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UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी- भरण-पोषण इतना अधिक न हो कि पति के लिए असहनीय बोझ बन जाए

Wed, 18 Feb 2026 06:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 Feb 2026 06:43 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण की राशि न तो इतनी अधिक होनी चाहिए कि वह पति के लिए असहनीय बोझ बन जाए और न ही इतनी कम कि पत्नी और बच्चे अभाव में जीवन जीने को मजबूर हों।

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Allahabad High Court's comment- Maintenance should not be so much that it becomes an unbearable burden for the
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण की राशि न तो इतनी अधिक होनी चाहिए कि वह पति के लिए असहनीय बोझ बन जाए और न ही इतनी कम कि पत्नी और बच्चे अभाव में जीवन जीने को मजबूर हों। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ पारिवारिक न्यायालय की ओर से तय 16 हजार रुपये प्रतिमाह की भरण-पोषण राशि को घटाकर आठ हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया। उन्होंने यह आदेश पति की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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फतेहपुर के पारिवारिक न्यायालय ने 22 अप्रैल 2025 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए पति की आय लगभग 32 हजार रुपये प्रतिमाह मानकर पत्नी को 10 हजार और बेटे को छह हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति अनिल कुमार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसकी आय लगभग 30–32 हजार रुपये प्रतिमाह है, ऐसे में 16 हजार रुपये प्रतिमाह देना अत्यधिक है। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कमी नहीं है। इसलिए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पत्नी विधिक रूप से विवाहित है और उसके पास स्वयं की आय का कोई स्रोत नहीं है। बेटा भी आश्रित है, लेकिन भरण-पोषण तय करते समय पति की शुद्ध आय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा और कुलभूषण कुमार बनाम राजकुमारी मामलों का हवाला देते हुए कहा कि भरण-पोषण पति की शुद्ध आय के लगभग 25 प्रतिशत तक उचित माना जा सकता है। 32 हजार रुपये की आय पर 16 हजार रुपये प्रतिमाह देना लगभग 50 प्रतिशत होता है, जो अत्यधिक है। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश में संशोधन करते हुए भरण-पोषण की कुल राशि आठ हजार रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया। यह राशि आवेदन की तिथि से देय होगी।

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