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यूपी: 'सर तन से जुदा' का नारा देश की संप्रभुता को चुनौती, बरेली हिंसा के आरोपी तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज

Tue, 08 Sep 2026 10:40 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 08 Sep 2026 10:40 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट तौकीर रजा को झटका लगा है। बरेली हिंसा के आरोपी की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। साथ ही कहा है कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ की तुलना ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’, ‘जय श्री राम’ या ‘हर-हर महादेव’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती।

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Allahabad High Court rejects bail to Tauqeer Raza in Bareilly violence case
Tauqeer Raza in Bareilly violence case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ नारा कानून और देश की संप्रभुता-अखंडता को चुनौती देता है। यह नारा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने वाला है। इसकी तुलना ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’, ‘जय श्री राम’ या ‘हर-हर महादेव’ जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगे के मामले में आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान व डॉ.नफीस को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। 
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बरेली हिंसा के आरोपी तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज
बरेली हिंसा मामले में कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि तौकीर रजा ने इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान पर लोगों को इकट्ठा होने और मुस्लिम समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उकसाया था। रोक के बावजूद 200 से 250 लोग पहुंचे थे।

पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया तो ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए पथराव कर दिया था। पेट्रोल बम और फायरिंग की गई थी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया था। मामले में तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की। वह 27 सितंबर 2025 से जेल में हैं।

याची पक्ष की दलील
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वह निर्दोष हैं। उन्हें राजनीतिक दुर्भावना से मामले में फंसाया गया है। उन्होंने हिंसा के लिए कोई अपील नहीं की और न ही वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे। 26 सितंबर को घर में नजरबंद कर दिया गया था। 

 

राज्य सरकार का पक्ष
राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि आरोपी ने 19 सितंबर 2025 की बैठक में लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर नमाज के बाद पहुंचने की अपील की थी। घटना के बाद आरोपी ने सह-आरोपी के घर से वीडियो के माध्यम से बड़ी संख्या में पहुंचने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और उनके कृत्यों की सराहना की।

 

कोर्ट ने कहा...कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों को नहीं दी जा सकती मंजूरी
कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने शुक्रवार की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र होने का आह्वान किया था। इसके लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों को मंजूरी नहीं दी जा सकती। सभी परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद कोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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