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आजम खां को हाईकोर्ट से झटका, बेटे के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में हस्तक्षेप से इंकार
Fri, 14 Feb 2020 10:21 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 14 Feb 2020 10:21 PM IST
सार
-अब्दुल्ला आजम का फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में कोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार
-प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार, चार्जशीट में पर्याप्त साक्ष्य: हाईकोर्ट
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पिता आजम खां के साथ अब्दुल्ला आजम
- फोटो : Social Media
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विस्तार
रामपुर के सपा सांसद मो. आजम खां उनकी पत्नी तंजीम फातिमा व बेटे मो. अब्दुल्ला आजम खां को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में इनके खिलाफ रामपुर की अदालत में चल रहे मुकदमे व चार्जशीट को रद्द करने से इंकार कर दिया है।
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राजनीतिक दल के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम खां को स्वार से विधायक बनवाने के लिए फर्जी जन्म तिथि तैयार कराने का आरोप लगाया है। इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए एसीजेएम रामपुर ने आरोपियों को सम्मन जारी कर हाजिर होने का आदेश दिया है। आजम खां ने मुकदमे की कार्यवाही व चार्जशीट को रद्द करने की मांग में याचिका दाखिल की थी।
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याचिका पर न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने दोनों पक्षों के वकीलों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि याचिका में उठाए गए विधिक बिंदु ट्रायलकोर्ट में विचारणीय हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि चार्जशीट में प्रथम दृष्टया आपराधिक मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार मौजूद है। ऐसे में मुकदमे को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है।
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कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपराध की प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार है। चार्जशीट से प्रथम दृष्टया आपराधिक केस बनता हो तो आरोप के साक्ष्य पर मुकदमे के विचारण के समय विचार किया जाएगा। प्रथम दृष्टया अपराध कारित हो रहा हो तो कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट के इस फैसले से आजम खां के परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मालूम हो कि अब्दुल्ला आजम खां ने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीटेक व एमटेक की शिक्षा हासिल की। उनके सभी शैक्षणिक दस्तावेजों में एक जनवरी 1993 जन्म तिथि दर्ज है। 28 जून 2012 को अब्दुल्ला आजम खां ने रामपुर नगर पालिका परिषद से जन्मतिथि प्रमाणपत्र बनवाया और बदलाव करते हुए जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 कर दी।
इसे निरस्त कराये बगैर नगरपालिका परिषद लखनऊ से 2015 में दोबारा 30 सितंबर 1990 की जन्मतिथि से जन्म प्रमाणपत्र जारी करवाया गया। धोखाधड़ी कूटकरण के आरोप में तीनों लोगों के खिलाफ आकाश सक्सेना ने गंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। मामला सीजेएम कोर्ट में है जिसे रद्द करने की मांग की गई थी।
फर्जी प्रमाणपत्र पर रद्द हो चुका है चुनाव
जिस फर्जी जन्म प्रमाणपत्र को लेकर मुकदमा चल रहा है उसी प्रमाणपत्र के कारण हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम का स्वार से विधानसभा सदस्य का निर्वाचन रद्द कर दिया है। अब्दुल्ला के खिलाफ नवाब कासिम अली ने चुनाव याचिका दाखिल कर फर्जी जन्मतिथि पर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया था। जांच में हाईकोर्ट ने आरोपों को सही पाया। हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई है।