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Allahabad high court: पीस पार्टी के अध्यक्ष को मिली अग्रिम जमानत
Tue, 03 May 2022 01:25 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 03 May 2022 01:25 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएम योगी को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब खान की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याची को अग्रिम जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया जाता है। याची को 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत बांड केसाथ दो जमानतदारों के आधार पर छोड़ दिया जाए।
मामला सन 2016 का है। गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में आयोजित सार्वजनिक रैली में खलीलाबाद के विधायक और पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब पर कथित तौर पर आरोप है कि उन्होंने सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे। इसके साथ ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी।
डॉ. अयूब के खिलाफ गोरखपुर केकैंट थाने में आईपीसी की धारा 295ए, 500, 504, 505, 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अप्रैल 2017 में चार्जशीट पेश की गई और संबंधित मजिस्ट्रेट ने मार्च 2021 में इस मामले का संज्ञान लिया। सत्र न्यायालय ने डॉ. अयूब की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। याची के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है और राजनीतिक द्वेष की भावना से झूठा फंसाया गया है।
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याची केखिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी नहीं है। जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई, वे अपराध बनते ही नहीं हैं। उधर, सरकारी अधिवक्ता की ओर से याची केकब्जे से किसी भी तरह की सामग्री बरामद किए जाने के मामले में कोई जवाब नहीं दिया गया। लिहाजा, कोर्ट ने याची की अग्रिम जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया।
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मामला सन 2016 का है। गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में आयोजित सार्वजनिक रैली में खलीलाबाद के विधायक और पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब पर कथित तौर पर आरोप है कि उन्होंने सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे। इसके साथ ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी।
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डॉ. अयूब के खिलाफ गोरखपुर केकैंट थाने में आईपीसी की धारा 295ए, 500, 504, 505, 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अप्रैल 2017 में चार्जशीट पेश की गई और संबंधित मजिस्ट्रेट ने मार्च 2021 में इस मामले का संज्ञान लिया। सत्र न्यायालय ने डॉ. अयूब की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। याची के अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है और राजनीतिक द्वेष की भावना से झूठा फंसाया गया है।
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याची केखिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी नहीं है। जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई, वे अपराध बनते ही नहीं हैं। उधर, सरकारी अधिवक्ता की ओर से याची केकब्जे से किसी भी तरह की सामग्री बरामद किए जाने के मामले में कोई जवाब नहीं दिया गया। लिहाजा, कोर्ट ने याची की अग्रिम जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया।