फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court Order the FIR registered against journalist Siddharth Varadarajan and Ismat Ara canceled

Allahabad High Court Order :  पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और इस्मत आरा के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द

Thu, 26 May 2022 01:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 26 May 2022 01:17 AM IST
सार

सिद्धार्थ वरदराजन और इश्मत आरा सहित तीन पत्रकारों के खिलाफ रामपुर के सिविल लाइंस थाने में 31 जनवरी 2021 को खबर प्रकाशित करके किसानों को भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता रामपुर निवासी संजू तुरैहा ने आरोप लगाया था कि लोगों को गुमराह करने के लिए डॉक्टर का हवाला दिया और इस लेख से रामपुर में आम लोगों में रोष और तनाव पैदा हो गया।

विज्ञापन
Allahabad High Court Order the FIR registered against journalist Siddharth Varadarajan and Ismat Ara canceled
सिद्धार्थवरदराजन और इस्मत आरा। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर खबर प्रकाशित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और इस्मत आरा को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दोनों पत्रकारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याचियों की ओर से प्रकाशित खबर में कोई राय या दावा नहीं मिलता है, जो लोगों को उकसाने का काम करे या जिससे सार्वजनिक अव्यवस्था, गड़बड़ी या दंगा फैले। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार और रजनीश कुमार की खंडपीठ ने सिद्धार्थ वरदराजन व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। 

विज्ञापन




सिद्धार्थ वरदराजन और इश्मत आरा सहित तीन पत्रकारों के खिलाफ रामपुर के सिविल लाइंस थाने में 31 जनवरी 2021 को खबर प्रकाशित करके किसानों को भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता रामपुर निवासी संजू तुरैहा ने आरोप लगाया था कि लोगों को गुमराह करने के लिए डॉक्टर का हवाला दिया और इस लेख से रामपुर में आम लोगों में रोष और तनाव पैदा हो गया।

विज्ञापन

याचियों ने एफआईआर रद्द करने की लगाई थी गुहार

मामले में याची ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने याचियों को हाईकोर्ट के समक्ष अर्जी दाखिल करने का आदेश दिया था। उसके बाद याचियों ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की गुहार लगाई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा किए गए प्रकाशन के अवलोकन से संकेत मिलता है कि इसमें घटना के तथ्य का उल्लेख है। उसके बाद घटना के संबंध में परिवार के सदस्यों के बयान और डॉक्टरों द्वारा दी गई कथित जानकारी, यूपी पुलिस का इनकार और उस दिन क्या हुआ था, इस तथ्य का उल्लेख है।



यह प्रकाशन 30 जनवरी 2021 को सुबह किया गया था और उसी दिन रामपुर पुलिस द्वारा शाम साढ़े चार बजे तीनों डॉक्टरों का स्पष्टीकरण जारी किया गया था। उसके तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं द्वारा समाचार प्रकाशित किया गया था। पूर्वोक्त समाचार यह प्रकट नहीं करते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उनके परिणामों के साथ कोई राय व्यक्त की गई थी।



इसलिए इस न्यायालय को याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई राय या दावा नहीं मिलता है, जो लोगों को उकसाने या उकसाने का प्रभाव हो सकता है। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि समाचार के प्रकाशन से सार्वजनिक अव्यवस्था, गड़बड़ी या दंगा हुआ था। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed