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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court: Officials cannot register a minor's marriage; age verification is mandatory.

इलाहाबाद हाईकोर्ट : नाबालिग के विवाह का पंजीकरण नहीं कर सकते अधिकारी, उम्र सत्यापन जरूरी

Sat, 12 Sep 2026 04:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 12 Sep 2026 04:03 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के विवाह के पंजीकरण को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के सभी विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विवाह की तारीख पर वर या वधू में से कोई बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 2(ए) के तहत ‘बालक’ है तो विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाए।

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Allahabad High Court: Officials cannot register a minor's marriage; age verification is mandatory.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग के विवाह का पंजीकरण करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि विवाह पंजीकरण अधिकारी उम्र से संबंधित दस्तावेजों का विश्वसनीय आधार पर सत्यापन किए बिना पंजीकरण नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि विवाह के समय यदि वर या वधू में से कोई बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 2(ए) के तहत ‘बालक’ है तो ऐसे विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।

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न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने यह आदेश मथुरा जिले के दीपक पाल की अपील पर दिया। अपीलकर्ता दीपक पाल के खिलाफ थाना हाईवे में अपहरण, दुष्कर्म और अन्य मामलों में विचारण न्यायालय ने सजा सुनाई थी। इसी आदेश को अपील के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

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अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कथित घटना के समय पीड़िता करीब 19 वर्ष की थी। उसके साथ दीपक पाल का स्वेच्छा से विवाह हुआ था और विवाह का विधिवत पंजीकरण भी कराया गया था।

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राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि विचारण न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर पीड़िता को नाबालिग पाया था। आरोप लगाया गया कि विवाह का पंजीकरण उसकी कम उम्र का तथ्य छिपाकर कराया गया।

हाईकोर्ट ने संबंधित विवाह पंजीकरण अधिकारी को तलब किया। कोर्ट ने पंजीकरण की परिस्थितियों के संबंध में संतोषजनक व्याख्या नहीं मिलने पर कहा कि उम्र सत्यापन किए जाने का कोई प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है।

अदालत ने कहा कि विवाह पंजीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी केवल दस्तावेज दर्ज करने तक सीमित नहीं है। उसे उम्र से संबंधित दस्तावेजों का विश्वसनीय सत्यापन करना भी आवश्यक है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजीकरण अधिकारी की निगरानी, सत्यापन और जवाबदेही में गंभीर विफलता मानी।

कोर्ट की टिप्पणी बाल विवाह के मामलों में विवाह पंजीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी को स्पष्ट करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था मानी जा रही है।

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