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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court: Hearing of Mathura Shahi Idgah-Krishna Janmabhoomi dispute case on April 17

Allahabad High Court : मथुरा शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले की सुनवाई 17 अप्रैल को

Thu, 23 Mar 2023 08:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 23 Mar 2023 08:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंध समिति व उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से दाखिल जवाबी हलफनामे का प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है।

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Allahabad High Court: Hearing of Mathura Shahi Idgah-Krishna Janmabhoomi dispute case on April 17
श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंध समिति व उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से दाखिल जवाबी हलफनामे का प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए 17 अप्रैल को पेश करने का निर्देश दिया है। मथुरा अदालत में चल रहे मुकदमे की सुनवाई पर पहले ही रोक लगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामले में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से सिविल जज की अदालत में सिविल वाद दायर कर 20 जुलाई 1973 के फैसले को रद्द करने तथा 13.37 एकड़ कटरा केशव देव की जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान के नाम घोषित किए जाने की मांग की गई है। वादी का कहना था कि जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर 1973 में दिया गया फैसला वादी पर लागू नहीं होगा। क्योंकि वह पक्षकार नहीं था। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्ति की पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 30 सितंबर 20 को सिविल वाद खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से अपील दाखिल की गई।

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दोनों पक्षों की ओर से दिए गए तर्क

विपक्षी ने अपील की पोषणीयता पर आपत्ति की। जिला जज मथुरा की अदालत ने अर्जी मंजूर करते हुए अपील को पुनरीक्षण अर्जी में तब्दील कर दी। पुनरीक्षण अर्जी पर पांच प्रश्न तय किए गए। 19 मई 22 को जिला जज की अदालत ने सिविल जज के वाद खारिज करने के आदेश 30 सितंबर 20 को रद्द कर दिया और अधीनस्थ अदालत को दोनों पक्षों को सुनकर नियमानुसार आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। जिसकी वैधता को इन याचिकाओं में चुनौती दी गई है।

याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफ ए नकवी का कहना है कि प्लेसेस ऑफ वार्शिप एक्ट 1991 के तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। इस कानून में सभी पूजा स्थलों की 15 अगस्त 1947 की स्थिति में बदलाव पर रोक लगी है। कोर्ट ने कहा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के केस में पहले ही अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही पर रोक लगी है। विपक्षी भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से जवाब दाखिल किया गया है। दो हफ्ते में याचीगण अपना प्रतिउत्तर हलफनामा दाखिल कर दें ताकि अगली तिथि पर दोनों याचिकाओं का एक साथ निस्तारण किया जा सके।

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