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श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद : मुस्लिम पक्ष ने कहा, मस्जिद कटरा केशवदेव की जमीन पर नहीं

Fri, 23 Feb 2024 04:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Feb 2024 04:41 PM IST
सार

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के मामले में दूसरे दिन शुक्रवार को भी बहस पूरी नहीं हो सकी। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 29 फरवरी मुकर्रर की है। बृहस्पतिवार और शुक्रवार दोनों दिन मुस्लिम पक्ष के वकील ने ही अपना पक्ष रखा। 

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Allahabad High Court: Hearing in Shri Krishna Janmabhoomi dispute case on 29 February
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मथुरा कटरा केशव देव के नाम दर्ज जमीन से शाही ईदगाह मस्जिद का अवैध कब्जा हटाकर भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन सिविल वाद की सुनवाई जारी है। मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि शाही ईदगाह मस्जिद कटरा केशवदेव की भूमि पर नहीं है। वह अलग है, इसमें कोई विवाद नहीं है।

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भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव व अन्य सिविल वादों की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक जैन की पीठ कर रही है। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 11 के तहत मस्जिद पक्ष की ओर से सिविल वाद की पोषणीयता पर की गई आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता तसनीम अहमदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से दूसरे दिन भी बहस की।
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कहा,श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ एवं ट्रस्ट व शाही ईदगाह मस्जिद के बीच 1968 में हुए एक समझौते के तहत मंदिर व मस्जिद की स्थिति स्पष्ट की गई है। मस्जिद कटरा केशव देव की जमीन पर नहीं है। इस संबंध में डिक्री भी है।
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कहा, मंदिर, मस्जिद अलग हैं। इसमें कोई विवाद नहीं है। और सिविल वाद मियाद कानून से भी बाधित है। शुरू से मस्जिद रही है। वह वक्फ संपत्ति है, जिसे लेकर सिविल कोर्ट को मुकदमा सुनने का अधिकार नहीं है। इस आधार पर सिविल वाद खारिज किया जाय।
 

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से पक्ष रखा गया। अन्य विपक्षियों की ओर से अधिवक्ता नसीरूज्जमा, हरे राम त्रिपाठी,प्रणय ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता वजाहत हुसैन खान,एम के सिंह ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल व आकांक्षा शर्मा के अलावा वादी पक्ष के तमाम अधिवक्ता व पक्षकार मौजूद थे।


वाद संख्या 7/23 में वादी अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने का समय मांगा। सात वादों की पोषणीयता पर आदेश सात नियम 11 के तहत आपत्ति दाखिल नहीं की गई है। अगली सुनवाई तक आपत्ति का मौका दिया गया है। वाद संख्या 3/23 में आपत्ति पर जवाब दाखिल करने का समय दिया गया। वाद संख्या 12/23 व 14/23 में दाखिल अर्जी वापस लेकर नए सिरे से दाखिल करने की अनुमति दी गई। मामलों की सुनवाई 29 फरवरी को होगी।


 
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