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Allahabad High Court :  श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में सुनवाई अब 18 अप्रैल को, दोनो पक्षों की बहस जारी

Thu, 04 Apr 2024 04:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Apr 2024 04:35 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही मस्जिद की ओर से पक्ष रखा गया।

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Allahabad High Court: Hearing in Shri Krishna Janmabhoomi dispute case now on April 18
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी होने के बाद हिंदू पक्ष की ओर से बहस जारी है। कोर्ट ने समयाभाव को देखते हुए आगे की सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की है। भगवान श्री कृष्ण विराजमान एट कटरा केसर देव की ओर से दाखिल विवादों की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक जैन की पीठ कर रही है।

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इसके पहले बृहस्पतिवार को सुनवाई शुरू होते ही मस्जिद पक्ष की ओर से मंदिर पक्ष की ओर से दाखिल वादों की पोषणीयता पर सवाल खड़े किए गए। कहा गया कि सभी वाद प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, लिमिटेशन एक्ट, वक्फ एक्ट सहित विभिन्न कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत बाधित है। लिहाजा, सभी वादों को खारिज किया जाए। मस्जिद पक्ष की ओर से तसलीमा अहमदी ने बहस की।

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जवाब में मंदिर पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से वादों की पोषणीयता पर उठाए जा रहे हैं सवाल बेबुनियाद है। सभी वाद पोषणीय है। वाद लिमिटेशन एक्ट, सीपीसी के आदेश के नियम 11 के तहत बाधित नहीं हैं। मंदिर पक्ष की ओर से हरे राम त्रिपाठी सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी पक्ष रखा। कोर्ट ने वाद संख्या 11 के वादी की ओर से मुस्लिम पक्ष की ओर से की गई आपत्तियों पर जवाब दाखिला न करने पर नाराजगी जाहिर की और आपत्ति दाखिल करने का मौका दिया।

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हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 1669 में औरंगजेब के आदेश के तहत मंदिर को तोड़ा गया। कोर्ट को 400 सौ साल पहले के ऐतिहासिक तथ्यों को देखने की जरूरत है। विष्णु शंकर जैन ने भूमि विवाद से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 15 आदेशों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही। न्याय मित्र मार्कंडेय राय ने भी वादों के संबंध में अपनी राय प्रस्तुत की। कोर्ट ने समयाभाव को देखते हुए सुनवाई की अगली तिथि 18 अप्रैल को तय की है।

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