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UP: 'जिम्मेदारियों से बचने को लिव इन रिलेशनशिप की ओर आकर्षित हो रहे हैं युवा', इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

Sat, 25 Jan 2025 01:52 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 25 Jan 2025 01:52 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने ने शादी का झूठा वादा कर पीड़िता से शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी आकाश को जमानत दे दी। याची के वकील ने दलील दी कि पीड़िता वयस्क महिला है। दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। पीड़िता लगभग छह वर्षों से आरोपी के साथ सहमति संबंध में थी। गर्भपात के आरोप भी बेबुनियाद हैं।

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Allahabad High Court granted bail to accused in the case of having a relationship on the pretext of marriage
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि युवा अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सहमति संबंध की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि इसकी सामाजिक स्वीकृति नहीं है। अब समय आ गया है कि हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए और समाज में नैतिक मूल्यों को बचाने के लिए रूपरेखा तय कर समाधान का प्रयास करना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने शादी का झूठा वादा कर पीड़िता से शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी आकाश को जमानत दे दी।

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वाराणसी के थाना सारनाथ में आरोपी आकाश पर पीड़िता ने दुष्कर्म, एससी/एसटी एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया गया और फिर गर्भपात भी कराया। इसके बाद शादी करने से इन्कार कर दिया। मामले में ट्रायल कोर्ट ने छह अगस्त, 2024 को आरोपी की जमानत खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई।
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याची के वकील ने दलील दी कि पीड़िता वयस्क महिला है। दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। पीड़िता लगभग छह वर्षों से आरोपी के साथ सहमति संबंध में थी। गर्भपात के आरोप भी बेबुनियाद हैं। आरोपी ने पीड़िता से कभी शादी का वादा नहीं किया था। मामले में आरोपी 28 अप्रैल, 2024 से जेल में बंद है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

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