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इलाहाबाद हाईकोर्ट : हत्या के आरोपी के खिलाफ लगाई गई रासुका रद्द, कोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश
Sat, 02 Mar 2024 03:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 Mar 2024 03:24 PM IST
सार
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने कमलवीर सिंह की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते कहा कि हत्या की एक घटना के आधार पर याची को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिरासत में रखने की जरूरत नहीं थी।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक)
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में रखे गए मुरादाबाद के याची को राहत दी है। कोर्ट ने तीन दिसंबर के आदेश को रद्द करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने कमलवीर सिंह की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते कहा कि हत्या की एक घटना के आधार पर याची को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हिरासत में रखने की जरूरत नहीं थी। याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा ने बहस की।
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याची पर मुरादाबाद में हुई अनुज चौधरी की हत्या का आरोप लगाया गया था। उसका नाम जांच में सामने आने के बाद उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। डीएम ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर तीन दिसंबर, 2023 को याची के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में भेज दिया।
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याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची की ओर से कहा गया कि उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। उसे कोई कानूनी सहायता नहीं दी गई। उसने जब अपने को हिरासत से स्वतंत्र करने का आवेदन दिया तो उसे भी खारिज कर दिया गया।
कहा गया कि उसका नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं है। बाद में उसे एक षड़यंत्र के तहत फंसाया गया। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए रासुका के आदेश को रद्द कर दिया। कहा, याची को दंडात्मक रूप से हिरासत में रखा गया था।