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Allahabad High Court : हाईकोर्ट की सख्ती पर मृतक आश्रित पत्नी को किया देयों का भुगतान 

Mon, 20 Dec 2021 09:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 20 Dec 2021 09:06 PM IST
सार

आवास-विकास के हाउसिंग कमिश्नर व अधिशासी अभियंता कोर्ट में हुए पेश। मेरठ जिले का मामला, पति की मौत के बाद पत्नी को नहीं हुए थे सभी देयों के भुगतान।

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Allahabad High Court: Dues were paid to the deceased dependent wife on the strictness of the High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पति की मौत के बाद उसकी पत्नी सुरमेश देवी को पेंशन, इंश्योरेंस, जीपीएफ सहित अन्य देयों के भुगतान न होने के मामले में सोमवार को आवास-विकास के हाउसिंग कमिश्नर अजय चौहान और मेरठ डिवीजन-4, सहारनपुर के अधिशासी अभियंता एमबी कौशिक हाईकोर्ट में पेश हुए। दोनों अधिकारियों से कोर्ट से माफी मांगते हुए बताया कि उन्होंने विधवा के सभी देय का भुगतान कर दिया है। जो भुगतान बाकी हैं, वे भी जल्द कर दिए जाएंगे। जबकि, पेंशन देने के मामले में दोनों अधिकारियों ने समय मांगा है। कोर्ट ने कहा कि विधवा को पेंशन का भुगतान कर उसका विवरण कोर्ट में पेश करें।

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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल खंडपीठ कर रही थी। कोर्ट ने पिछली तिथि पर दोनों अधिकारियों को उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। याची का कहना था कि उसके पति की 21 फरवरी 2021 को मौत हो गई थी। उसके बाद से उसे पेंशन नहीं नहीं दी जा रही है। इसके अलावा इंश्योरेंश, जीपीएफ का भी भुगतान नहीं किया गया। 

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पेंशन मांगने पर थमा दिया नोटिस
याची का कहना था कि विभाग ने मृतक आश्रित में उसके बेटे को नौकरी तो दी लेकिन उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर उस पर दबाव बना रहे हैं। अधिकारियों ने नोटिस जारी कर कहा है कि आप अपनी माता और घरवालों का भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं, क्यों न आपकी सेवा समाप्त कर दी जाए। आवास-विकास की ओर से जारी इस नोटिस को याची ने कोर्ट में भी प्रस्तुत किया था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

कोर्ट ने इस मामले में दो बार पहले भी याची को पेंशन देने, इंश्योरेंश, जीपीएफ सहित अन्य भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन आवास विकास परिषद ने कोई कार्रवाई नहीं की। सोमवार को पेश हुए दोनों अधिकारियों ने जवाबी हलफनामा लगाते हुए कोर्ट से माफी मांगी और देयों के भुगतान की बात कही। याची के अधिवक्ता ने पेंशन दिए जाने का मामला उठाया। उस पर प्रतिवादी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची के पति की नियुक्ति वर्ष 2010 में हुई। इसलिए वह पेंशन की हकदार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याची की सेवाओं को उसकी संविदा से जोड़कर देखा जाएगा। इस पर प्रतिवादी के अधिवक्ता ने दो हफ्ते का समय मांग लिया।
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