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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया वाराणसी के वक्फ इमामबाड़ा मस्जिद के मजलिस के आयोजन में व्यवधान न डालने का निर्देश
Mon, 05 Oct 2020 07:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 05 Oct 2020 07:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के वक्फ इमामबाड़ा मस्जिद मीर इमाम अली मेंहदी बेगम में मजलिस के आयोजन में व्यवधान ना डालने का जिला प्रशासन को निर्देश दिया है। कोर्ट ने कोविड 19अन- लाक चार की गाइडलाइन का पालन करते हुए मजलिस के आयोजन की अनुमति का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची से कहा है कि परिसर को सैनिटाइज कर मास्क पहनकर व सोसल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए धार्मिक मजलिस आयोजित की जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इमामबाड़ा वाराणसी के जियापुर, गोविन्द पुर कला,बंदीटोला में स्थित है।
याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था कि 30सितंबर से नौ अक्तूबर 10 दिन आम दिनों में मजलिस का आयोजन होता रहा है। शिया वक्फ बोर्ड ने इस आयोजन की सुरक्षा के लिए 21अगस्त 20 को पुलिस मांगी थी।ताकि मजलिस में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। महामारी अधिनियम के तहत बिना लिखित आदेश के मौखिक रूप से मजलिस के आयोजन को रोका जा रहा है। जब कि राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी कर 100 लोगों की अधिकतम संख्या के साथ धार्मिक आयोजन करने की छूट दी है।
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याची अधिवक्ता का कहना है कि मजलिस के आयोजन से रोका जाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)व 25के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। याची गाइडलाइन का पालन करते हुए मजलिस का आयोजन करना चाहता है। जिसपर कोर्ट ने जिला प्रशासन को मजलिस के आयोजन में व्यवधान न डालने का निर्देश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इमामबाड़ा वाराणसी के जियापुर, गोविन्द पुर कला,बंदीटोला में स्थित है।
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याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था कि 30सितंबर से नौ अक्तूबर 10 दिन आम दिनों में मजलिस का आयोजन होता रहा है। शिया वक्फ बोर्ड ने इस आयोजन की सुरक्षा के लिए 21अगस्त 20 को पुलिस मांगी थी।ताकि मजलिस में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। महामारी अधिनियम के तहत बिना लिखित आदेश के मौखिक रूप से मजलिस के आयोजन को रोका जा रहा है। जब कि राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी कर 100 लोगों की अधिकतम संख्या के साथ धार्मिक आयोजन करने की छूट दी है।
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याची अधिवक्ता का कहना है कि मजलिस के आयोजन से रोका जाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)व 25के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। याची गाइडलाइन का पालन करते हुए मजलिस का आयोजन करना चाहता है। जिसपर कोर्ट ने जिला प्रशासन को मजलिस के आयोजन में व्यवधान न डालने का निर्देश दिया है।