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Allahabad High Court : डिजिटल तकनीक बदल रही अपराध का चेहरा, झकझोर रही समाज की नैतिकता
Sun, 06 Jul 2025 07:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 06 Jul 2025 07:02 AM IST
सार
कोर्ट ने यह व्यवस्था भी दी कि यदि भविष्य में किसी आरोपी को जमानत मिलती है और वह ट्रायल में सहयोग नहीं करता या जानबूझकर देरी करता है तो ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार होगा कि वह हाईकोर्ट की अनुमति के बिना ही उसकी जमानत रद्द कर सके।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डिजिटल तकनीक अपराध का चेहरा बदल रही है। यह नए तरह का सामाजिक हमला है। यह न सिर्फ किसी व्यक्ति की गरिमा को रौंदता है, बल्कि पूरे समाज की नैतिकता को झकझोरता है। लिहाजा, सोशल मीडिया पर किसी महिला की अश्लील तस्वीर वायरल करने का आरोपी राहत का हकदार नहीं है।
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत ने प्रयागराज निवासी याची की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को एक साल में मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है। मामला उतरांव थाना क्षेत्र का है। याची पर एक गांव की एक महिला की आपत्तिजनक तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप है।
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याची नौ जनवरी, 2025 से जेल में है। पुलिस ने उसके मोबाइल से कुछ तस्वीरें बरामद कर एफएसएल जांच के लिए भेजी हैं, जिसकी रिपोर्ट अभी लंबित है। कोर्ट ने याची की जमानत अर्जी खारिज कर कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरों का प्रसारण किसी की पूरी जिंदगी को नर्क बना सकता है। इसलिए याची जमानत पाने का हकदार नहीं है।
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एक वर्ष के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करे
कोर्ट ने परीक्षण न्यायालय को निर्देशित किया कि वह एक वर्ष के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करे और एफएसएल रिपोर्ट दो माह में दाखिल की जाए। साथ ही गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने का भी आदेश दिया गया है।
- कोर्ट ने यह व्यवस्था भी दी कि यदि भविष्य में किसी आरोपी को जमानत मिलती है और वह ट्रायल में सहयोग नहीं करता या जानबूझकर देरी करता है तो ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार होगा कि वह हाईकोर्ट की अनुमति के बिना ही उसकी जमानत रद्द कर सके।