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UP News: दूसरे धर्म में शादी कर आठ कपल ने कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, अदालत ने सिरे से खारिज की ये डिमांड

Tue, 30 Jan 2024 11:46 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 30 Jan 2024 11:46 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैरकानूनी अंतरधार्मिक विवाह करने वालों की सुरक्षा से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने हिंदू-मुस्लिम जोड़ों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर राहत नहीं दी। 

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Allahabad High Court denies protection to those who perform illegal inter-religious marriages
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू-मुस्लिम जोड़ों की ओर से सुरक्षा की मांग वाली आठ याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा है कि शादियां उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने मुरादाबाद सहित अन्य जिलों से दाखिल याचिकाओं पर दिया।
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जोड़ों ने अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से अपनी सुरक्षा और अपने वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने के निर्देश के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में यह जोड़ा है कि यदि याचियों द्वारा कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद विवाह किया जाता है तो वे नए सिरे से सुरक्षा की मांग वाली याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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2021 में पारित धर्मांतरण विरोधी कानून गलत बयानी, बल, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती और प्रलोभन द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में रूपांतरण पर रोक लगाता है।
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हाईकोर्ट जिन आठ याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, उसमें पांच मुस्लिम युवकों ने हिंदू महिलाओं से और तीन हिंदू युवकों ने मुस्लिम महिलाओं से शादी की थी। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं के धर्म का उल्लेख किया।

बता दें कि यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्य की अधिनियमित धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

बीएसए प्रयागराज प्रवीण कुमार त्रिपाठी की गिरफ्तारी पर रोक
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रयागराज प्रवीण कुमार त्रिपाठी की जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर थाने में दर्ज एफआईआर के तहत विवेचना में सहयोग की शर्त पर गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

 

यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने प्रवीण कुमार त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना है कि जब वह जौनपुर में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पर पर तैनात था, उस समय जिला विद्यालय निरीक्षक जौनपुर के कोरोना संक्रमित होने के कारण इस पद का प्रभार था।

 

हिंदू इंटर कालेज मुंगराबादशाहपुर की प्रबंध समिति का चुनाव उसकी व संयुक्त शिक्षा निदेशक वाराणसी की निगरानी में संपन्न हुआ। याची ने पद का दायित्व निभाते हुए नव निर्वाचित प्रबंधक का हस्ताक्षर सत्यापित किया। शिकायतकर्ता ने धारा 156(3) के तहत षड्यंत्र धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की अदालत में अर्जी दी, जिस पर प्रश्नगत एफआईआर दर्ज की गई है।
याची का यह भी कहना है कि इस मामले में उसके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। वह सरकारी सेवक है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत सरकार की अनुमति लिए बगैर उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। प्राथमिकी झूठी है। केवल उसे परेशान करने के लिए है।

 

प्रबंध समिति चुनाव में कुछ अवैध हुआ है तो शिकायतकर्ता को कानून के तहत चुनौती देने का अधिकार है। याची ने पद का दायित्व निभाया है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का उल्लघंन है। इसलिए एफआईआर रद्द की जाय। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
 
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