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हाईकोर्ट ने कई विभागों पर की तल्ख टिप्पणी, कहा- अभ्यर्थी कोर्ट न आएं तो क्या नहीं मिलेगी नौकरी
Sat, 05 Jan 2019 07:08 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 05 Jan 2019 07:08 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड सहित विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि, अधिकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज करने का चलन अपना लिया है। अभ्यर्थी अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए अदालत की शरण लेने के लिए बाध्य किए जाते हैं। यदि किसी वजह से कोई कोर्ट नहीं आ पाता है तो बिना किसी गलती के भी वह चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा।
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सिपाही भर्ती की अभ्यर्थी नर्वदा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति इरशाद अली ने पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि, याची का दावा ओबीसी कटेगरी के तहत सिपाही भर्ती 2015 में स्वीकार किया जाए। उसने अपनी कटेगरी में 415.09 अंक प्राप्त किए हैं। याचिका पर अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की। याची ने महिला सिपाही के लिए आवेदन किया था। परीक्षा में पास होने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसने मांगी गई तिथि का जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। साथ ही नवीनतम जाति प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत कर दिया। भर्ती बोर्ड ने इस आधार पर उसे चयन से बाहर कर दिया था, जबकि न्यूनतम कट ऑफ अंक से अधिक उसने प्राप्त किए थे।
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हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए समस्त दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज तलब की। प्रमुख सचिव गृह से रिपोर्ट भी मांगी। दस्तावेजों और प्रमुख सचिव की रिपोर्ट से साफ हुआ कि याची पिछड़ा वर्ग का लाभ पाने की हकदार थी। अधिकारियों की लापरवाही से उसे सामान्य वर्ग का मान लिया और चयन से वंचित कर दिया गया। याची का कहना था कि उसने दूसरा जाति का प्रमाणपत्र सद्भावना पूर्वक दाखिल किया था। अधिकारियों ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। इसकी पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज पेश की गई। कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही मानते हुए याची की नियुक्ति पर विचार का निर्देश दिया है।
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