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हाईकोर्ट ने कहा: मुकदमा दर्ज होते ही गिरफ्तारी मानवाधिकारों का उल्लंघन, हेड कांस्टेबल की अग्रिम जमानत मंजूर 

Tue, 01 Jun 2021 06:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 01 Jun 2021 06:00 PM IST
सार

याची पर आरोप लगाया गया है कि वह एक अन्य सिपाही के साथ मिलकर ट्रकों को पास कराने के लिए पैसों की वसूली करता हैं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है। संज्ञान में आने पर विभाग ने मुकदमा दर्ज किया

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allahabad high court approves anticipatory bail of head constable in corruption case
इलाहाबाद हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस विभाग में तैनात हेड कांस्टेबल को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि आपराधिक केस दर्ज होते ही अकारण गिरफ्तारी मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद किसी की गिरफ्तारी का उपयोग अंतिम विकल्प व अपवाद स्वरूप किया जाना चाहिए। 
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गिरफ्तारी करना जरूरी हो तभी इस शक्ति का प्रयोग किया जाना चाहिए। यही नहीं कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जोगिंदर कुमार केस में उल्लेखित नेशनल पुलिस कमीशन की तीसरी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी ही पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत है ।
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यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने अलीगढ़ में तैनात हेड कांस्टेबल जुगेंदर सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए दिया है। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची हेड कांस्टेबल के खिलाफ 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा थाना- देलही गेट, अलीगढ़ में सब इंस्पेक्टर ने दर्ज कराया है। 
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याची पर आरोप लगाया गया है कि वह एक अन्य सिपाही के साथ मिलकर ट्रकों को पास कराने के लिए पैसों की वसूली करता हैं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है। संज्ञान में आने पर विभाग ने मुकदमा दर्ज किया।
 

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि याची को गलत फंसाया गया है लगाया गया आरोप झूठा है। याची से न तो कोई पैसों की रिकवरी हुई है और न ही वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराकर इसके सत्यता की पुष्टि ही की गई है। 

कहा गया था कि पुलिस इस गलत प्राथमिकी के आधार पर याची को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी। इस अग्रिम जमानत अर्जी का अपर शासकीय अधिवक्ता ने विरोध कर कहा कि मामला गंभीर है। याची की गिरफ्तारी की आशंका निराधार है। काल्पनिक डर के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने याची पर लगे आरोप, अपराध की प्रकृति और कोरोना संक्रमण की बढ़ती दूसरी लहर एवं तीसरी लहर की संभावना पर विचार कर याची की अग्रिम जमानत की अर्जी को सशर्त मंजूर कर लिया। कोर्ट ने कहा कि याची की गिरफ्तारी की दशा में उसे पुलिस रिपोर्ट का कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने तक उसे 50 हजार के व्यक्तिगत बांड व इसी रकम के दो प्रतिभूति प्रस्तुत करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।

कोर्ट ने इस अग्रिम जमानत में याची को जांच में सहयोग करने समेत कई शर्तें लगाई हैं और कहा है कि इन शर्तों का याची के उल्लंघन करने पर जांच अधिकारी अथवा सरकारी वकील अग्रिम जमानत को निरस्त कराने की अर्जी दे सकता है। 
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