इलाहाबाद लोकसभा : 72 प्रत्याशियों को चित कर डॉ.जोशी ने इलाहाबाद सीट पर भाजपा का खोला खाता
वर्ष 1991 के चुनाव में मामूली अंतर से चुनाव हारने वाली भाजपा ने वर्ष 1996 के चुनाव में जनता दल की सरोज के सामने डॉ.मुरली मनोहर जोशी को टिकट थमाया था। इस चुनाव में डॉ.जोशी व सरोज दुबे समेत कुल 73 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे।
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1996 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट पर भाजपा ने अपना खाता खोला। डॉ.मुरली मनोहर जोशी ने 72 प्रत्याशियों को चित कर इस चुनाव को अपने नाम किया था। इलाहाबाद संसदीय सीट पर वर्ष 1996 में इतिहास में सबसे कम मात्र 37.10 फीसदी ही मतदान हुआ था। कम मतदान के बाद भी डॉ.जोशी ने जनता दल की प्रत्याशी सरोज दुबे को एक लाख से अधिक मतों से हराया था। सरोज दुबे 1991 में इसी लोकसभा सीट से निर्वाचित हुई थीं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी श्यमाचरण गुप्ता को छह हजार वोटों से हराया था। इस चुनाव में सरोज को 29.72 प्रतिशत व श्यामाचरण गुप्ता को 28.38 प्रतिशत वोट मिले थे।
वर्ष 1991 के चुनाव में मामूली अंतर से चुनाव हारने वाली भाजपा ने वर्ष 1996 के चुनाव में जनता दल की सरोज के सामने डॉ.मुरली मनोहर जोशी को टिकट थमाया था। इस चुनाव में डॉ.जोशी व सरोज दुबे समेत कुल 73 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। इलाहाबाद संसदीय सीट पर अब तक सबसे अधिक प्रत्याशी इसी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में 62 प्रत्याशी निर्दलीय थे। चुनावी नतीजों में 58 निर्दलीय प्रत्याशी एक हजार से भी कम वोट पाकर सिमट गए थे।
अधिकतर को 500 वोट भी नहीं मिल सका था। निर्दलीय प्रत्याशी लल्लू सिंह को तो महज 70 वोट से ही संतोष करना पड़ा था। इसके बाद डॉ.जोशी लगातार तीन बार इस संसदीय सीट से निर्वाचित हुए। डॉ.जोशी के चुनावी संचालन समिति में शामिल रहे लोगों का मानना है कि डॉ.जोशी ने प्रचार का अपना एक अलग तरीका अपनाया था। यह उनकी कामयाबी का राज था। वह मंडल व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों से सीधा चुनावी फीडबैक लेते थे। इसका लाभ मिलता था और उन्हें जमीनी स्तर की सूचनाएं मिलती थीं।
अलग रणनीति से प्रचार करते थे पार्टी के लोग
डॉ.जोशी के चुनाव संचालन समिति के सदस्य रहे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय बताते हैं कि डॉ.जोशी चुनाव के एलान होने से पहले ही बैठकें करना शुरू कर देते थे। वह बड़ी सभाएं करने के बजाय छोटी बैठकें करते थे। इसके लिए पहले से ही रणनीति तैयार होती थी। रोजाना रात में सिविल लाइंस स्थित केंद्रीय कार्यालय में अगले दिन की दिनचर्या पर बातचीत हो जाती थी। अगले दिन सभी अपने-अपने हिस्से आई जिम्मेदारियों को निभाने निकल पड़ते थे। गांव-गांव में सभा की जगह स्वागत समारोह में वह लोगों को संबोधित करते थे। उनका मानना था कि भीड़ जुटाने से नहीं लोगों तक अपनी बातें पहुंचाने से चुनाव की राह आसान होती है।
लंबे समय तक डॉ.जोशी के निजी सचिव रहे बृजेश गुप्ता बताते हैं कि लोग उन्हें बड़ा चेहरा मानकर उनके साथ नहीं जुड़ते थे, बल्कि उनके कामकाज के तरीके को देखकर उनके साथ होते थे। यमुनापार का विकास उनकी प्राथमिकता थी। नैनी में औद्योगिक उद्योगों को पैकेज दिलाने का कार्य रहा हो या फिर यमुनापार को शहर से जोड़ने के लिए नए यमुना पुल का निर्माण।
डॉ.जोशी का यह कौशल था कि वह पिछड़े धड़े या इलाके को अपने साथ जोड़ लेते थे। वहीं, भाजपा कार्यकर्ता रवींद्र मिश्र बताते हैं कि उनके पिता डॉ. जोशी के चुनाव समिति का हिस्सा थे। घर पर लगातार चुनावी बैठकें होती थीं। इसमें बूथ, मंडल व ब्लाक स्तर के कार्यकर्ता शामिल होते थे। डॉ.जोशी का कहना था कि जमीनी हकीकत ब्लॉक व बूथ स्तर के ही लोग बता सकते हैं। वह छोटे कार्यकर्ताओं को सीधा काम सौंपते थे और फिर उनसे उस कार्य का हिसाब भी मांगते थे। वह युवा थे और उन्हें व अजय त्रिपाठी को प्रचार गाड़ियों के प्रंबंधन का कार्य मिला था।
1996 के चुनाव में प्रमुख दलों का यह था हाल
दल - प्रत्याशी - मिले मत - प्रतिशत
भाजपा - डॉ. मुरली मनोहर जोशी - 216544 - 42.71
जनता दल - सरोज दुबे - 113321 - 22.32
बसपा - रामसेवक सिंह - 102352 - 20.16
कांग्रेस - जगदीश नारायण - 30007 - 5.91
निर्दलीय - विजय शंकर - 7827 - 1.54
डॉ.जोशी के महत्वपूर्ण कार्य
1.यमुना पर देश का पहला केबिल ब्रिज (नया यमुना पुल) बनवाया
2.भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना
3.एमएलएनआर को एमएनएनआईटी के रूप में एनआईटी का दर्जा
4.इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा
5.केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय
6.झूंसी में भू-चुंबकत्व केंद्र की स्थापना