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नियत अवधि के लिए जारी सभी कोर्ट आदेश 10 मई तक बढे़
Fri, 24 Apr 2020 12:30 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 24 Apr 2020 12:30 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना महामारी से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों, कामर्शियल कोर्ट, दुर्घटना दावा अधिकरण एवं भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास अधिकरण पारिवारिक अदालतों, श्रम अदालतों, औद्योगिक अधिकरणों व अन्य अधिकरणों द्वारा जारी अंतरिम आदेशों को एक बार फिर बढ़ा दिया है। अब पूर्व में पारित अंतरिम आदेश 10 मई तक प्रभावी रहेंगे। जमानत के आदेश 15 मई तक जारी रहेंगे । बेदखली, कब्जा हटाने या ध्वस्तीकरण आदेशों पर रोक 15 मई तक जारी रहेगी।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर दिया है। इससे पहले खंडपीठ ने जनहित याचिका कायम कर 19 मार्च से अगले एक माह के दौरान समाप्त होने वाले सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 26 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी थी। उम्मीद थी कि हालात सामान्य हो जाएंगे और लॉकडाउन खत्म हो जायेगा। मगर लॉकडाउन तीन मई तक बढ़ाए जाने के कारण हाईकोर्ट ने एक बार फिर अंतरिम आदेशों को बड़ा दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जो आदेश अगले आदेश पर निर्भर हैं, उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। वह जारी रहेंगे ।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत या नियमित जमानत दी गई है और एक माह के भीतर उसकी अवधि पूरी हो रही है तो वह अगले 15 मई तक जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट या जिला अदालतों द्वारा यदि कोई ध्वस्तीकरण या बेदखली आदेश जारी किया गया है तो वह भी 15 मई तक निष्प्रभावी रहेगा। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार या नगर निकाय या अन्य कोई ऐसी एजेंसी नागरिकों के खिलाफ ध्वस्तीकरण व बेदखली कार्रवाई करने में शिथिलता बरतेगी।
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कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के महाधिवक्ता, अपर सालीसिटर जनरल आफ इंडिया, सहायक सालीसिटर जनरल आफ इंडिया, राज्य लोक अभियोजक एवं बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन को भेजे जाने का आदेश दिया है ।
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 एवं 227 के अंतर्गत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए वादकारियों के हित में उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए यह सामान्य समादेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट का आदेश हाईकोर्ट के अलावा सभी जिला अदालतों, हाईकोर्ट क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अंतर्गत आने वाले सभी अधिकरणों व न्यायिक संस्थाओं पर लागू होगा ।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर दिया है। इससे पहले खंडपीठ ने जनहित याचिका कायम कर 19 मार्च से अगले एक माह के दौरान समाप्त होने वाले सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 26 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी थी। उम्मीद थी कि हालात सामान्य हो जाएंगे और लॉकडाउन खत्म हो जायेगा। मगर लॉकडाउन तीन मई तक बढ़ाए जाने के कारण हाईकोर्ट ने एक बार फिर अंतरिम आदेशों को बड़ा दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जो आदेश अगले आदेश पर निर्भर हैं, उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। वह जारी रहेंगे ।
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कोर्ट ने यह भी कहा है कि आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत या नियमित जमानत दी गई है और एक माह के भीतर उसकी अवधि पूरी हो रही है तो वह अगले 15 मई तक जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट या जिला अदालतों द्वारा यदि कोई ध्वस्तीकरण या बेदखली आदेश जारी किया गया है तो वह भी 15 मई तक निष्प्रभावी रहेगा। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार या नगर निकाय या अन्य कोई ऐसी एजेंसी नागरिकों के खिलाफ ध्वस्तीकरण व बेदखली कार्रवाई करने में शिथिलता बरतेगी।
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कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के महाधिवक्ता, अपर सालीसिटर जनरल आफ इंडिया, सहायक सालीसिटर जनरल आफ इंडिया, राज्य लोक अभियोजक एवं बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन को भेजे जाने का आदेश दिया है ।
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 एवं 227 के अंतर्गत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए वादकारियों के हित में उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए यह सामान्य समादेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट का आदेश हाईकोर्ट के अलावा सभी जिला अदालतों, हाईकोर्ट क्षेत्राधिकार के अंतर्गत अंतर्गत आने वाले सभी अधिकरणों व न्यायिक संस्थाओं पर लागू होगा ।