UP : सामान्य आरोपों पर आपराधिक मुकदमे का सामना करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की अदालत ने प्रांजन शुक्ला व दो अन्य की अर्जी पर दिया। गौतमबुद्ध नगर के महिला थाने में 2018 में आवेदक प्रांजल शुक्ला व अन्य पर दहेज उत्पीड़न व अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए समन जारी कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति सहित अन्य पर दहेज उत्पीड़न व अन्य मामलों में दर्ज मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि वैवाहिक मामलों में सामान्य आरोपों पर किसी को आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़े तो यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। खासकर वैवाहिक मामलों में अदालत का यह कर्तव्य है कि वह प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोपों की गहन जांच करे कि इनमें कोई सच्चाई है या नहीं।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की अदालत ने प्रांजन शुक्ला व दो अन्य की अर्जी पर दिया। गौतमबुद्ध नगर के महिला थाने में 2018 में आवेदक प्रांजल शुक्ला व अन्य पर दहेज उत्पीड़न व अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज कराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए समन जारी कर दिया है। इस पर आवेदक ने आरोप पत्र, समन व मुकदमे की संपूर्ण को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई।
दहेज का आरोप मनगढ़ंत, कोर्ट ने रद्द किया केस
आवेदक के वकील ने दलील दी कि संपूर्ण एफआईआर के साथ-साथ विपक्षी के बयानों में दहेज आदि की मांग के संबंध में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप हैं। किसने और कब दहेज की मांग की। इसका जिक्र एफआईआर या गवाहों के बयान में नहीं किया गया है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध संपूर्ण सामग्री से भी आवेदकों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। ऐसे में मामले की संपूर्ण कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों में आवेदकों के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया गया है। दहेज की मांग, यातना के संबंध में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर की बारीकी से जांच व गवाहों के बयान से यह स्पष्ट है कि पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद के कारण दहेज की मांग, प्रताड़ना, उत्पीड़न के संबंध में झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही रद्द कर दी।