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Prayagraj News: 1934 में जगी शिक्षा की अलख से अब भी रोशन है अलादादपुर
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ग्राम प्रधान विजय कुमार।
1934 में दो लोगों ने गांव में शिक्षा की ऐसी अलख जगाई कि आज तक पूरा गांव रोशन है। बात हो रही है जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर बसे अलादादपुर गांव की। यहां अधिकांश लोग शिक्षक हैं। कुछ इंजीनियर तो कुछ अन्य सरकारी विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पांच हजार की आबादी वाले गांव में क्षत्रिय परिवारों की संख्या अधिक है। इसमें पुरुष 3100 और महिला 1900 हैं। अधिकतर लोग शिक्षित है और शिक्षा जगत से जुड़े हैं। गांव की अधिकतर महिलाएं भारतीय आजीविका मिशन संगठन से जुडी हैं। गांव वाले बताते हैं दिवंगत ठाकुर बद्री सिंह और छत्रपाल सिंह की वजह से गांव में शिक्षा की ऐसी अलख जगी कि पूरा गांव बदल गया। इन लोगों ने वर्ष 1934 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त किए थे।
इन लोगों से प्रेरणा लेते हुए गांव के राज करन सिंह 1988 में मध्य प्रदेश के चीफ इंजीनियर बने। स्थायी रूप से वह मध्य प्रदेश में ही रहते हैं। लेकिन, यहां भी हर साल आते रहते हैं। नई पीढ़ी की बात करें तो 21 साल की उम्र में 2022 में वरुण सिंह चौहान सेना में फ्लाइंग आफिसर के पद पर नियुक्त हुए और असम में तैनात हैं। गांव के रुद्धनाथ सिंह भौतिक विज्ञान और हरनाम सिंह एक कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक हैं। इसके अलावा मदन मोहन शुक्ला लालगोपालगंज में स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। इसके अलावा कई युवा प्राइवेट सेक्टर में अच्छी कंपनियों में कार्यरत हैं।
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शिक्षक रहे राम अभिलाष सिंह बताते हैं, हम लोगों ने काफी कठिन परिस्थितियों में बच्चों को अच्छी शिक्षा दी। यही वजह है कि गांव के अधिकांश युवा अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा काम रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके पास हजार से ज्यादा किताबों का संग्रह है। युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
गांव में है प्राचीन मंदिर
गांव में एक कुआं है। कभी सभी लोग इससे ही सिंचाई किया करते थे। इसी के बगल शिवनाथ का प्राचीन मंदिर है। पूरे गांव के लोग यहीं पूजा पाठ करते हैं। गांव में हर साल ग्रामीणों की ओर से रामायण मेला लगता है। यहां सत्संग के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। गांव में भाईचारे का माहौल है।
नहीं है सिंचाई की व्यवस्था
गांव के प्रधान विजय कुमार बताते हैं, गांव में सिंचाई के लिए नहर है न ही सरकारी नलकूप। साथ ही आनापुर न्याय पंचायत में एक भी गौशाला नहीं है। बेसहारा मवेशियों से किसानों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि कई बार इस बाबत बड़े अधिकारियों को लिख चुके हैं। लेकिन, अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पांच हजार की आबादी वाले गांव में क्षत्रिय परिवारों की संख्या अधिक है। इसमें पुरुष 3100 और महिला 1900 हैं। अधिकतर लोग शिक्षित है और शिक्षा जगत से जुड़े हैं। गांव की अधिकतर महिलाएं भारतीय आजीविका मिशन संगठन से जुडी हैं। गांव वाले बताते हैं दिवंगत ठाकुर बद्री सिंह और छत्रपाल सिंह की वजह से गांव में शिक्षा की ऐसी अलख जगी कि पूरा गांव बदल गया। इन लोगों ने वर्ष 1934 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त किए थे।
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इन लोगों से प्रेरणा लेते हुए गांव के राज करन सिंह 1988 में मध्य प्रदेश के चीफ इंजीनियर बने। स्थायी रूप से वह मध्य प्रदेश में ही रहते हैं। लेकिन, यहां भी हर साल आते रहते हैं। नई पीढ़ी की बात करें तो 21 साल की उम्र में 2022 में वरुण सिंह चौहान सेना में फ्लाइंग आफिसर के पद पर नियुक्त हुए और असम में तैनात हैं। गांव के रुद्धनाथ सिंह भौतिक विज्ञान और हरनाम सिंह एक कॉलेज में अंग्रेजी के शिक्षक हैं। इसके अलावा मदन मोहन शुक्ला लालगोपालगंज में स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। इसके अलावा कई युवा प्राइवेट सेक्टर में अच्छी कंपनियों में कार्यरत हैं।
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शिक्षक रहे राम अभिलाष सिंह बताते हैं, हम लोगों ने काफी कठिन परिस्थितियों में बच्चों को अच्छी शिक्षा दी। यही वजह है कि गांव के अधिकांश युवा अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा काम रहे हैं। वह बताते हैं कि उनके पास हजार से ज्यादा किताबों का संग्रह है। युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
गांव में है प्राचीन मंदिर
गांव में एक कुआं है। कभी सभी लोग इससे ही सिंचाई किया करते थे। इसी के बगल शिवनाथ का प्राचीन मंदिर है। पूरे गांव के लोग यहीं पूजा पाठ करते हैं। गांव में हर साल ग्रामीणों की ओर से रामायण मेला लगता है। यहां सत्संग के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। गांव में भाईचारे का माहौल है।
नहीं है सिंचाई की व्यवस्था
गांव के प्रधान विजय कुमार बताते हैं, गांव में सिंचाई के लिए नहर है न ही सरकारी नलकूप। साथ ही आनापुर न्याय पंचायत में एक भी गौशाला नहीं है। बेसहारा मवेशियों से किसानों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि कई बार इस बाबत बड़े अधिकारियों को लिख चुके हैं। लेकिन, अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

ग्राम प्रधान विजय कुमार।

ग्राम प्रधान विजय कुमार।

ग्राम प्रधान विजय कुमार।