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Akhara Parishad : अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर घमासान, महानिर्वाणी के रवींद्र ने बताया खुद को अध्यक्ष

Sun, 06 Oct 2024 05:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 06 Oct 2024 05:21 PM IST
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Akhara Parishad: Conflict over the post of President of Akhara Parishad, Ravindra of Mahanirvani
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में हिस्सा लेते साधु संत। - फोटो : अमर उजाला।

महाकुंभ की तैयारियों की दिशा-दशा पर मंथन के लिए जुटे अखाड़ों के संतों ने सीएम योगी के आगे मसौदा प्रस्तुत करने से पहले दो धड़ों में बंट गए। अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष पद के दो दावेदारों ने खम ठोंकना शुरू कर दिया। निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी फिलहाल, अध्यक्ष के तौर पर अखाड़ा परिषद की बैठक का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने देर शाम अपने साथ 10 अखाड़ों का समर्थन पत्र होने का दावा किया। जबकि, महानिर्वाणी अखाड़े के रवींद्र पुरी ने खुद को निर्वाचित अध्यक्ष बताकर असहज स्थिति पैदा कर दी।

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दारागंज स्थित निरंजनी अखाड़े में दो दिन से चल रही अखाड़ा परिषद की बैठक में फिलहाल, विरोधी गुट के संतों ने छह अखाड़ों के ही शामिल होने का दावा किया है। शाम को हरिद्वार से प्रयागराज पहुंचे महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने कहा कि वह अखाड़ा परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष हैं।
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उन्होंने दावा किया कि दो दिन से जिस परिषद की बैठक में प्रस्ताव पास हो रहे हैं, उसमें सात अखाड़े शामिल नहीं हुए हैं। इस बैठक में पंचायती अटल अखाड़ा, पंचायती निर्वाणी अणी अखाड़ा, पंचायती निर्मल अखाड़ा, पंचायती नया उदासीन अखाड़ा, पंच निर्मोही, पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और दिगंबर अनी अखाड़ा के पदाधिकारी शामिल नहीं हुए।

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दस अखाड़ों का समर्थन मिलने का दावा

उधर, परिषद के अध्यक्ष के रूप में बैठक ले रहे निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि उनके साथ 10 अखाड़ों का समर्थन पत्र प्राप्त हो चुका है। निरंजनी के अलावा पंच निर्वाणी, जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा, पंच अग्नि अखाड़ा और आनंद अखाड़ा के अलावा निर्मोही अखाड़े के अपने साथ होने की उन्होंने बात कही।

उनका कहना था कि निर्मोही अखाड़े के सचिव अब राजेंद्र दास नहीं रह गए हैं। जब वह अखाड़े में किसी पद पर ही नहीं हैं तो वह अखाड़ा परिषद के महामंत्री कैसे हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजेंद्र दास की जगह सत्येंद्र दास ने उनको समर्थन पत्र भेज दिया है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ को लेकर दो दिन की बैठक में दो निर्णय लिए गए हैं, उन पर अमल कराने के लिए रविवार को वह सीएम योगी के समक्ष अपना एजेंडा प्रस्तुत करेंगे।

जो लोग अपने को अध्यक्ष और महामंत्री बता रहे हैं, उनकी स्थिति उन अखाड़ों में ही ठीक नहीं है, जहां से वह जुड़े हुए हैं। राजेंद्र दास का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। 13 में से 10 अखाड़े मेरे साथ हैं, जिसका बहुमत होता है, सरकार उसी की बनती है। - महंत रवींद्र पुरी ( निरंजनी अखाड़ा), अध्यक्ष अखाड़ा परिषद

मैं अखाड़ा परिषद का निर्वाचित अध्यक्ष हूं। दो दिन से जो बैठकें चल रही हैं, उसमें सिर्फ पांच अखाड़े ही शामिल हुए हैं। महाकुंभ मेरे नेतृत्व में होगा। - दूसरे धड़े के अध्यक्ष, महंत रवींद्र पुरी (महानिर्वाणी)

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