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यूपीपीएससी का आकाश गंगा : जिस तल की अनुमति, वहीं तक प्रवेश, नए भवन में परीक्षा गोपनीयता की अभेद्य दीवार
Mon, 31 Aug 2026 04:33 PM IST
विनोद सिंह
विनोद कुमार तिवारी, प्रयागराज
विनोद कुमार तिवारी, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 31 Aug 2026 04:33 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) का नया भवन अब सिर्फ सरकारी कार्यालय नहीं रहेगा, बल्कि देश के लोक सेवा आयोगों के लिए आधुनिक परीक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का नया मॉडल बनेगा।
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यूपीपीएससी, UPPSC
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) का नया भवन अब सिर्फ सरकारी कार्यालय नहीं रहेगा, बल्कि देश के लोक सेवा आयोगों के लिए आधुनिक परीक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का नया मॉडल बनेगा। 11 मंजिला इस परिसर में जिस भी व्यक्ति को जिस तक की अनुमति होगी उसे वहीं तक प्रवेश मिलेगा। आयोग परिसर में करीब 23 हजार वर्गफीट में बन रहा 11 मंजिला ‘आकाश गंगा’ भवन निर्माण के अंतिम चरण में है। भवन की छत का काम पूरा हो चुका है। अक्तूबर तक निर्माण पूरा होने की उम्मीद है और नवंबर में मुख्यमंत्री के हाथों इसका लोकार्पण कराने की तैयारी है।
भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर बद्रीनाथ की तर्ज पर आदि शंकराचार्य की प्रतिमा की प्रतिकृति स्थापित की जाएगी। भवन की दीवारों पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और चित्रों को उकेरा जाएगा। नए भवन में सुरक्षा व्यवस्था को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। बायोमीट्रिक एंट्री, एक्सेस कार्ड, अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे और अलग कंट्रोल रूम के जरिये हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
जिस अधिकारी, कर्मचारी या आगंतुक को जिस तल पर जाने की अनुमति होगी, वह केवल उसी तल तक पहुंच सकेगा। एक सेक्शन से दूसरे सेक्शन में अनधिकृत प्रवेश लगभग असंभव होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक्सेस कार्ड जारी किए जाएंगे। इस व्यवस्था का मकसद आयोग के कामकाज में पारदर्शिता के साथ ही परीक्षाओं की गोपनीयता को मजबूत करना है।
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भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर बद्रीनाथ की तर्ज पर आदि शंकराचार्य की प्रतिमा की प्रतिकृति स्थापित की जाएगी। भवन की दीवारों पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और चित्रों को उकेरा जाएगा। नए भवन में सुरक्षा व्यवस्था को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। बायोमीट्रिक एंट्री, एक्सेस कार्ड, अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे और अलग कंट्रोल रूम के जरिये हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
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जिस अधिकारी, कर्मचारी या आगंतुक को जिस तल पर जाने की अनुमति होगी, वह केवल उसी तल तक पहुंच सकेगा। एक सेक्शन से दूसरे सेक्शन में अनधिकृत प्रवेश लगभग असंभव होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक्सेस कार्ड जारी किए जाएंगे। इस व्यवस्था का मकसद आयोग के कामकाज में पारदर्शिता के साथ ही परीक्षाओं की गोपनीयता को मजबूत करना है।
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चार हजार अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा सुविधा
नए भवन में करीब चार हजार परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा सुविधा उपलब्ध होगी। लखनऊ में होने वाली परीक्षाओं को भी यहां कराने की योजना है। भूतल पर दो मल्टीपर्पज हॉल, दो कंप्यूटर परीक्षा हॉल, दो कंप्यूटर कक्ष और दो कंप्यूटर टेस्ट कक्ष बनाए जा रहे हैं। द्वितीय तल पर बड़ा परीक्षा हॉल और अभ्यर्थियों के लिए प्रतीक्षालय होगा। परीक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी नियंत्रित प्रवेश की व्यवस्था होगी।
इंटरव्यू बोर्ड का पता नहीं चलेगा
साक्षात्कार व्यवस्था को भी नए भवन में पूरी तरह गोपनीय और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। अलग-अलग इंटरव्यू कक्ष होंगे। अभ्यर्थी को यह भी पता नहीं चलेगा कि उसका साक्षात्कार किस बोर्ड के सामने होना है। अब तक सदस्यों के कक्ष में होने वाले साक्षात्कार के मुकाबले यह व्यवस्था ज्यादा सुरक्षित और गोपनीय होगी।
नए भवन में करीब चार हजार परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा सुविधा उपलब्ध होगी। लखनऊ में होने वाली परीक्षाओं को भी यहां कराने की योजना है। भूतल पर दो मल्टीपर्पज हॉल, दो कंप्यूटर परीक्षा हॉल, दो कंप्यूटर कक्ष और दो कंप्यूटर टेस्ट कक्ष बनाए जा रहे हैं। द्वितीय तल पर बड़ा परीक्षा हॉल और अभ्यर्थियों के लिए प्रतीक्षालय होगा। परीक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी नियंत्रित प्रवेश की व्यवस्था होगी।
इंटरव्यू बोर्ड का पता नहीं चलेगा
साक्षात्कार व्यवस्था को भी नए भवन में पूरी तरह गोपनीय और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। अलग-अलग इंटरव्यू कक्ष होंगे। अभ्यर्थी को यह भी पता नहीं चलेगा कि उसका साक्षात्कार किस बोर्ड के सामने होना है। अब तक सदस्यों के कक्ष में होने वाले साक्षात्कार के मुकाबले यह व्यवस्था ज्यादा सुरक्षित और गोपनीय होगी।
अध्यक्ष से लेकर गोपनीय विभाग तक अलग-अलग तल
भूतल : अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों के हाईटेक कार्यालय, मल्टीपर्पज हॉल और कंप्यूटर परीक्षा कक्ष।
पहली मंजिल: पूछताछ केंद्र, टेलीफोन एक्सचेंज, प्रमाणपत्र जांच केंद्र और फायर कंट्रोल रूम।
दूसरी मंजिल : परीक्षा हॉल, इंटरव्यू कक्ष और अभ्यर्थियों का प्रतीक्षालय।
तीसरी मंजिल : अध्यक्ष का कार्यालय और अलग इंटरव्यू कक्ष।
चौथी मंजिल : आयोग के सदस्यों के कक्ष। यहां नेम प्लेट नहीं होगी।
पांचवीं मंजिल : सेवा सेक्शन और सीधी भर्ती से जुड़े काम।
छठी मंजिल : कार्यालय।
सातवीं मंजिल : सचिव और वित्त विभाग।
आठवीं मंजिल : गोपनीय कंप्यूटर कक्ष।
नौवीं से 11 वीं मंजिल : परीक्षा विभाग।
भवन की छत का काम पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य की प्रगति की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा की जा रही है। उम्मीद है कि अक्तूबर तक काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद भवन के भव्य लोकार्पण की तैयारी की जाएगी। - गिरिजेश त्यागी, सचिव
भूतल : अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों के हाईटेक कार्यालय, मल्टीपर्पज हॉल और कंप्यूटर परीक्षा कक्ष।
पहली मंजिल: पूछताछ केंद्र, टेलीफोन एक्सचेंज, प्रमाणपत्र जांच केंद्र और फायर कंट्रोल रूम।
दूसरी मंजिल : परीक्षा हॉल, इंटरव्यू कक्ष और अभ्यर्थियों का प्रतीक्षालय।
तीसरी मंजिल : अध्यक्ष का कार्यालय और अलग इंटरव्यू कक्ष।
चौथी मंजिल : आयोग के सदस्यों के कक्ष। यहां नेम प्लेट नहीं होगी।
पांचवीं मंजिल : सेवा सेक्शन और सीधी भर्ती से जुड़े काम।
छठी मंजिल : कार्यालय।
सातवीं मंजिल : सचिव और वित्त विभाग।
आठवीं मंजिल : गोपनीय कंप्यूटर कक्ष।
नौवीं से 11 वीं मंजिल : परीक्षा विभाग।
भवन की छत का काम पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य की प्रगति की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा की जा रही है। उम्मीद है कि अक्तूबर तक काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद भवन के भव्य लोकार्पण की तैयारी की जाएगी। - गिरिजेश त्यागी, सचिव