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Air Force Engineer Murder Case: एसआईटी की निगरानी में जांच, 54 दिन बाद भी सवाल अनसुलझे

Sat, 24 May 2025 12:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 24 May 2025 12:04 PM IST
सार

वायुसेना कैंपस में कमांडर वर्क इंजीनियर सत्येंद्र नारायण मिश्र की हत्या के मामले में 54 दिन बाद भी सवाल अनसुलझे हैं। जांच एसआईटी की निगरानी में होने के बाद भी सवाल जहां के तहां खड़े हैं।

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Air Force Engineer Murder Case: Investigation under the supervision of SIT, questions remain unresolved even
prayagraj murder - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वायुसेना कैंपस में कमांडर वर्क इंजीनियर सत्येंद्र नारायण मिश्र की हत्या के मामले में 54 दिन बाद भी सवाल अनसुलझे हैं। जांच एसआईटी की निगरानी में होने के बाद भी सवाल जहां के तहां खड़े हैं। उधर, साजिश में शामिल आरोपी हनी उर्फ गौतम को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की कार्रवाई भी अभी बाकी है। एसआईटी के गठन के बावजूद खाली हाथ जांच एजेंसियां : पुलिस के खुलासे के मुताबिक, आरोपी सौरभ पासी ने जेल में बंद भाई की जमानत के लिए पैसे जुटाने के मकसद से चोरी की योजना बनाई। इसमें नाकाम रहने पर उसने 29 मार्च की भोर में अफसर की वायुसेना कैंपस स्थित उनके आवास में गोली मारकर हत्या कर दी।

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इस साजिश में उसकी मां, पिता और भाई हनी उर्फ गौतम भी शामिल थे। हालांकि, अफसर की पत्नी वत्सला मिश्रा ने इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह एक पूर्व नियोजित हत्या है। उनकी मांग पर चार अप्रैल को आईजी रेंज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। इसमें एडि. सीपी प्रयागराज और एसीपी धूमनगंज को शामिल किया गया। इस मामले में एसीपी धूमनगंज बृजेंद्र यादव का कहना है कि विवेचना एसआईटी की निगरानी में की जा रही है। एक-एक बिंदु पर जांच की जा रही है। जहां तक आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेने की बात है तो उस संबंध में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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संक्षेप में घटनाक्रम

  • 29 मार्च : तड़के करीब तीन बजे बमरौली स्थित वायुसेना कैंपस में सरकारी आवास पर अफसर की हत्या।
  • 31 मार्च : आरोपी सौरभ पासी, उसकी मां और पिता गिरफ्तार।
  • 1 अप्रैल : जेल में बंद भाई हनी उर्फ गौतम को भी साजिश में शामिल बताया गया।
  • 3 अप्रैल : अफसर की पत्नी ने पत्र भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की।
  • 4 अप्रैल : तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन।
  • 5 अप्रैल : एसआईटी ने जांच शुरू की, विवेचक से पूछताछ की गई।


अब भी अनसुलझे हैं परिजनों की ओर से उठाए गए यह सवाल

1. चोरी के इरादे से कोई दो असलहे क्यों लेकर आएगा।
2. 15 दिन पहले असफल प्रयास के बाद दोबारा हाई सिक्योरिटी जोन में घुसने की हिम्मत कैसे हुई।
3. पहले एक सहयोगी के साथ गया था, इस बार अकेले क्यों।
4. आरोपी को पता था घर में तीन लोग रहते हैं, फिर भी भिड़ंत की आशंका को क्यों नजरअंदाज किया।
5. हत्या के बाद हमलावर आराम से निकल गया, न कोई घबराहट, न जल्दबाजी, क्या यह डकैती जैसी हरकत है।
6. फरवरी में आरोपी ने 1.5 लाख का आईफोन खरीदा, पैसे कहां से आए जब भाई की जमानत के लिए भी पैसे नहीं थे।
7. हत्या के लिए 40 हजार की पिस्टल और पांच हजार का तमंचा खरीदा, लेकिन मकसद चोरी बताया गया, यह विरोधाभास क्यों।

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