प्रयागराज : सीजीएचएस की सुविधा में अब उम्र नहीं बनेगी बाधा, केंद्रीय कर्मियों को मिली बड़ी राहत
केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बड़ी राहत दी है। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में पंजीकृत कर्मचारियाें व पेंशनरों के आश्रित बेटों और भाइयों को गंभीर बीमारी पर आजीवन सीजीएचएस की सुविधाएं मिलेंगी।
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केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बड़ी राहत दी है। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में पंजीकृत कर्मचारियाें व पेंशनरों के आश्रित बेटों और भाइयों को गंभीर बीमारी पर आजीवन सीजीएचएस की सुविधाएं मिलेंगी। यानी उन्हें मुफ्त इलाज व दवाएं मिल सकेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सीजीएचएस और सीएस (एमए) नियमों के तहत गंभीर या जानलेवा बीमारियों से पीड़ित आश्रित बेटों और भाइयों के लिए महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। उप सचिव, भारत सरकार सोनिका खट्टर की ओर से निर्देश जारी कर नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
मौजूदा सीजीएचएस दिशानिर्देशों के अनुसार अविवाहित आश्रित बेटे 25 वर्ष की आयु तक सीजीएचएस सुविधाओं के पात्र होते हैं। स्थायी रूप से अक्षम अविवाहित बेटे आजीवन इन सुविधाओं के लिए पात्र हैं। इसी तरह आश्रित भाई आमतौर पर 18 वर्ष की आयु तक पात्र होते हैं, जबकि अक्षम आश्रित भाई बिना किसी आयु सीमा के कवर किए जा सकते हैं।
आश्रित बेटियां और बहनें पहले से ही निर्धारित शर्तों के अधीन सीजीएचएस सुविधाओं के लिए पात्र हैं। तलाकशुदा, परित्यक्त, पति से अलग हुई या विधवा बेटियां और बहनें भी मौजूदा प्रावधानों के तहत पात्र हैं। नए निर्णय के अनुसार गंभीर या जानलेवा बीमारियों से पीड़ित आश्रित बेटों और भाइयों को आजीवन सीजीएचएस/चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
मेडिकल बोर्ड करेगा पात्रता का मूल्यांकन
इन प्रावधानों में पुरानी, गंभीर, जानलेवा या अंतिम चरण की बीमारियां शामिल हैं। ये बीमारियां महत्वपूर्ण और निरंतर कार्यात्मक अक्षमता का कारण बनती हैं, जिससे आजीविका कमाने में असमर्थता होती है। पात्रता का निर्धारण व्यक्तिगत आधार पर बीमारी की प्रकृति और कार्यात्मक अक्षमता को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए पात्रता का मूल्यांकन विकेंद्रीकृत मेडिकल बोर्ड की ओर से किया जाएगा। यह बोर्ड अपर निदेशक/सीजीएचएस क्षेत्रीय मुख्यालय स्तर पर गठित होंगे। अपीलों पर विचार के लिए सीजीएचएस मुख्यालय में एक अपीलीय मेडिकल बोर्ड भी गठित होगा। सीएस (एमए) नियमों के तहत आने वाले लाभार्थियों के लिए पात्रता का मूल्यांकन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा किया जाएगा।
आश्रित के बच्चों या पत्नी को नहीं मिलेगा लाभ
यह सुविधा गंभीर बीमारी या स्थायी दिव्यांगता वाले आश्रित बेटों या भाइयों के लिए लागू होगी। शर्त यह है कि निर्धारित निर्भरता की शर्तें पूरी होती रहें। सक्षम मेडिकल बोर्ड या प्राधिकरण की ओर से कवरेज जारी रखने की सिफारिश आवश्यक है। यह छूट ‘परिवार’ की परिभाषा का विस्तार नहीं करेगी। लाभ केवल पात्र आश्रित बेटे या भाई तक सीमित रहेगा। यह उनके जीवनसाथी या बच्चों तक नहीं बढ़ेगा।
समय-समय पर होगी चिकित्सा मानदंडों की समीक्षा
नामित सीजीएचएस बोर्ड की ओर से समय-समय पर इस व्यवस्था की समीक्षा और संशोधन किया जाएगा। यह उचित चिकित्सा विशेषज्ञों के परामर्श से किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि नीति प्रासंगिक और प्रभावी बनी रहे।
केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इससे गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे आश्रित बेटों व भाइयों को काफी राहत मिलेगी। हालांकि, अभी विस्तृत गाइडलाइन जारी होने का इंतजार है। विस्तृत दिशानिर्देश मिलने के बाद स्पष्ट होगा कि इसे कैसे लागू किया जाना है। - डॉ.गुलाब चंद, अपर निदेशक, सीजीचएस, प्रयागराज