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‘खुले में शौचमुक्त’ के बाद अब संवरेंगे गंगा किनारे के गांव

Sun, 13 Aug 2017 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 13 Aug 2017 02:29 AM IST
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After the 'open defecation', the villages of Ganga Kinkare will now be converted
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नैनी के युनाइटेड इंजीनियरिंग कालेज में शनिवार को आयोजित गंगा ग्राम सम्मेलन में गंगा के किनारे बसे देश के 4480 गांवों को ‘खुले में शौचमुक्त’ करने की घोषणा की। इसी के अगले चरण में उन्होंने ‘गंगा ग्राम’ योजना की शुरुआत की। इसके तहत गंगा किनारे के गांवों का समग्र विकास किया जाएगा। पहले चरण में उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक पांचों राज्य के 24 गांव चुने गए हैं। समारोह में शामिल केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने ‘खुले में शौचमुक्त’ योजना की बची 972 करोड़ रुपये की राशि इस योजना को देने की घोषणा की। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी ले ली जाएगी।
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उमा भारती ने कहा कि गंगा किनारे के गांवों को खुले में शौचमुक्त योजना के लिए 1750 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन इनमें से 578 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। शेष राशि ‘गंगा ग्राम’ के विकास में खर्च की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत गंगा किनारे के सभी गांवों का संपूर्ण विकास किया जाएगा। उसमें गंदे पानी के ट्रीटमेंट, शवदाह गृह, कुंड के निर्माण आदि काम किए जाएंगे। ताकि, गंगा में गंदगी न जाने पाए। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी, भूपेंद्र सिंह, सांसद श्यामा चरण गुप्त, वीरेंद्र सिंह मस्त, विनोद सोनकर, विधायक हर्षवर्धन बाजपेई, नीलम करवरिया, अभिलाषा गुप्ता, सुबोध सिंह, केंद्रीय सचिव परमेश्वरन अय्यर, कमिश्नर डॉ.आशीष गोयल, डीएम संजय कुमार, सीडीओ सैमुअल पॉल एन. समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, भाजपा नेता और कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान, स्वच्छताग्राही आदि शामिल रहे।
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 ‘खुले में शौचमुक्त’ घोषित किए गए गंगा किनारे के गांव में प्रदेश के 22 जिलों के 1011 गांव भी शामिल हैं। इनके अलावा बिजनौर, हापुड़ और गाजियाबाद जिले को भी ‘खुले में शौचमुक्त’ घोषित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 दिसंबर तक गंगा के किनारे के प्रदेश के सभी जिलों को ‘खुले में शौचमुक्त’ घोषित करने की घोषणा की। इसके अगले चरण में दो अक्तूबर 2018 तक प्रदेश के सभी को ‘खुले में शौचमुक्त’ करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अक्तूबर 2019 तक देश के सभी जिलों को ‘खुले में शौचमुक्त’ करने का लक्ष्य रखा गया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत प्रदेश में 1.91 करोड़ शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 43 लाख का निर्माण हो चुका है। 78 लाख शौचालयों का निर्माण 31 मार्च 2017 तक कर लिया जाएगा। शेष 78 लाख शौचालयों का निर्मार्ण दो अक्तूबर 2018 तक करने का लख्य है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों ने लोगों से सहयोग की अपील की।

अनियमितता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने अफसरों को भी मानक के अनुरूप शौचालय निर्माण की हिदायत दी। साथ में लोगों से भी अपील की कि गांवों में शौचालय निर्माण के लिए सरकार 12 हजार रुपये दे रही है। लाभार्थी खुद की कुछ राशि लगाकर अच्छे शौचालय का निर्माण कर सकते हैं। उन्हाेंने लोगों के सहयोग से भी शौचालय निर्माण की अपील की। मुख्यमंत्री ने लोगों से सोच बदलने की भी जरूरत बताई। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गांवों को सिर्फ ‘खुले में शौचमुक्त’ करना मकसद नहीं है, लोगों में स्वच्छता का संस्कार विकसित होना चाहिए।

स्वच्छ गंगा जल के अविरल प्रवाह में सबसे बड़ी बाधा कानपुर की टेनरियों को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार प्रभावी कदम उठाने की तैयारी में है। इसे लेकर सियासत भी गरमा सकती है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने एक अपील के माध्यम से इस आशंका की ओर इशारा भी किया।

पूरे विश्व की 10 सबसे गंदी नदियों में गंगा भी शामिल हैं। इसमें भी कानपुर में गंगा सबसे अधिक गंदी हैं। गंगा की धाराओं के प्रवाह को बांधने की कोशिश उद्गम स्थल से ही शुरू हो जाती है और कानपुर तक आते-आते गंगा काफी कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में टेनरियों का प्रदूषित कचरा खतरनाक रूप ले चुका है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार प्रभावी कदम उठाने पर विचार कर रही है। उमा भारती का कहना है कि टेनरियों को ट्रीट करना है या शिफ्ट करना है। यह सोचना होगा। उन्हाेंने अपील की कि इस पर किसी तरह का धार्मिक या राजनीतिक विवाद बड़ा पाप होगा। हालांकि उन्हाेंने कहा कि नई तकनीकी आ चुकी है जिसमें जहरीले कचरा और पानी को भी ट्रीट करने की क्षमता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि 2019 तक कानपुर में भी गंगा जल की स्वच्छ तथा अविरल धारा के लिए योजना बनाई गई है। जल्द ही इस पर अमल होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शौचालय निर्माण और खुले में शौच को लेकर लोगों से सोच बदलने की अपील की। उन्हाेंने कहा कि आंगन में तुलसी का पौधा लगाया जाता है। इसलिए घर में शौचालय नहीं हो सकता। इस सोच को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि शवदाह की नई तकनीकी आ गई है। अब उसका उपयोग करना चाहिए। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि मोबाइल से ज्यादा जरूरी घर में शौचालय बनवाना है।


गंगा गांव सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संबोधन से पहले कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के अलावा सभी सांसदों, विधायकों और भाजपा नेताओं का नाम लिया लेकिन श्यामा चरण गुप्त का नाम लेना भूल गए। सभागार में से श्यामा चरण के नाम की आवाज उठने के बाद उन्होंने उनका नाम लिया।
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