बागवानी : घर की बगिया में हिंदुत्व की बयार, पौराणिक पौधों की बहार, जानें- रुद्राक्ष, कल्पवृक्ष और पारिजात के पौधे लगाने के फायदे
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद रुद्राक्ष, समी, ब्रह्म कमल, कुमकुम, तुलसी आदि के पौधों को लोग दे रहे वरीयता, सनातन आस्था के अनुरूप बना घर के आंगन का स्वरूप।
विस्तार
कोरोना संकट से उबरने के बाद लोगों का रुझान पौराणिक मान्यताओं की ओर तेजी से हुआ है। यही कारण है कि तमाम धार्मिक गतिविधियों में तो शहरियों की दिलचस्पी बढ़ी ही है, सनातन आस्था को ध्यान रखते हुए घर की बनावट-सजावट भी की जा रही है। यह आस्था अब बागवानी में भी दिखाई देने लगी है।
अभी तक लोग खुशबूदार या आकर्षक रंग वाले पौधों को अहमियत देते थे लेकिन, अब इनकी जगह रुद्राक्ष, शमी, पारिजात, ब्रह्म कमल, लक्ष्मी कमल, विष्णु कमल, कल्प वृक्ष, कुमकुम, तुलसी, हरिशंकरी जैसे पौराणिक महत्व वाले पौधों ने ली है। इन पौधों से घर का आंगन सजाने वाले न सिर्फ इसे शुभतादायी मानते हैं बल्कि उनका कहना है कि यह पौधे पर्यावरण के लिए भी हितकारी हैं। आगे पढ़ें...
तेजी से बढ़ रही पौराणिक महत्व के पौधों की मांग
शहर की सभी नर्सरियों में पौराणिक महत्व वाले पौधों की मांग तेजी से बढ़ी है। हर पौधे से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं। किसी से घर का क्लेश मिटता है तो किसी पौधे को लगाने से धन आकांक्षा की पूर्ति होती है। कुछ पौधों को घर में लगाने से बीमारियां न दूर होने का भी दावा है, लिहाजा कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के साथ इनकी मांग तेजी से बढ़ गई।
सोहबतिया बाग निवासी गृहणी स्नेहा तिवारी कहती हैं कि घर के लिए तुलसी का पौधा शुभ माना जाता है, जिसमें कई औषधियों के गुण होते हैं। जबकि भगवान शिव और गणेश जी को शमी पत्र चढ़ाना अधिक पुण्यदायी है। साथ ही मान्यता है कि पौराणिक महत्व वाले इन सभी पौधों में देवताओं का वास होता है। जो किसी भी अनिष्ट से बचाते हैं। अगली स्लाइड में पढ़ें किन पौधों का क्या है महत्व..
रुद्राक्ष : मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करने से मनोकामना पूरी होती है।
शमी : शिव पुराण में शिव और गणेश को अर्पित करना लाभदायी बताया गया है।
परिजात : शृंगार और पूजन में विशेष स्थान। मान्यता है कि इसे छूने मात्र से थकान मिट जाती है।
ब्रह्म कमल : भगवा शिव के विशेष प्रसाद के रूप में इसे बांटा जाता है।
कल्प वृक्ष : हिंदू मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त यह पौधा देवराज इंद्र को दिया गया था। यह मनोकामना भी पूरी करता है।
तुलसी : तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है। इसका धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है।
गहरा कर रहे राम से नाता
सरकार ने भगवान राम कीजन्मभूमि अयोध्या व तपोभूमि चित्रकूट तक राम वनगमन मार्ग बनाने का निर्णय लिया है। जो अयोध्या से प्रतापगढ़, शृंग्वेरपुर, प्रयागराज होकर चित्रकूट तक बनेगा। इस मार्ग के दोनों तरफ रामायणकालीन पौधे रोपित किए जाएंगे। सरकार की इस पहल का भी असर पड़ा है और लोग बागवानी में धार्मिक महत्व वाले पौधों को वरीयता दे रहे हैं।
ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पौधों की भी मांग बढ़ी
जार्जटाउन के पौधा कारोबारी राजीव पांडेय के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के बाद ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पौधों की मांग अचानक 70 फीसदी तक बढ़ गई है। पौराणिक महत्व वाले पौधों के साथ ही घरों एवं बेडरूम में पीस लिली, सिफोटिया पाम, रेड मंचेरा, डिप सिटी, एरिका प्लांट तेजी से बिक रहे हैं। इसके अलावा बोनसाई के बरगद, नीम, पीपल, बरगद, पाकड़, गुलर, आम की बिक्री भी पहले की तुलना में बढ़ी है।