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लॉक डाउन के बाद भी परीक्षा कराने में ढेरों बाधाएं
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में नए सत्र का समय से संचालन शुरू कर पाना बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। लॉक डाउन के बाद जब भी परीक्षाएं शुरू होंगी, प्रयागराज में रहने वाले छात्र-छात्राएं तो उसमें शामिल हो जाएंगे लेकिन बाहर रहने वाले विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में शामिल हो पाना आसान नहीं होगा। खासतौर पर वे छात्र-छात्राएं, जो रेड जोन के रूप में चिह्नित किए गए क्षेत्रों में रहते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए बीते वर्ष 13 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आवेदन मई के प्रथम सप्ताह तक लिए गए थे और 20 मई से पांच जून के बीच सभी प्रवेश परीक्षाएं करा ली गईं थीं। जून के दूसरे सप्ताह से रिजल्ट जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी जबकि 27 जून से बीकॉम एवं बीएएलएलबी में प्रवेश शुरू हो गए थे। लेकिन, इस बार लॉक डाउन की वजह से प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की जा सकी हैं। पिछली बार अब तक वार्षिक परीक्षाएं अंतिम दौर में थीं जबकि सेमेस्टर परीक्षाएं भी निर्धारित समय में ही करा ली गईं थीं। इस बार प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन हो या वार्षिक अथवा सेमेस्टर परीक्षाओं का आयोजन, इनका संचालन शुरू करने से पहले इविवि प्रशासन को कम से कम तीन मई तक इंतजार करना होगा।
अगर तीन मई के बाद लॉक डाउन हटता है तो भी इविवि प्रशासन के लिए परीक्षाएं करा पाना असान नहीं होगा। यहां बड़ी संख्या में छात्र दूसरे जिलों या प्रदेशों के हैं, जो लॉक डाउन में अपने घर चले गए हैं। कई छात्र ऐसे स्थानों पर रहते हैं, जिन्हें रेड जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। ऐसे में उनके लिए परीक्षा में शामिल हो पा आसान नहीं होगा। लॉक डाउन के बाद यह आशंका भी बनी रहेगी कि सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर लगाए गए तमाम प्रतिबंध हटाए जाते हैं या नहीं। परीक्षाओं में देरी के कारण नया सत्र पिछड़ने के पूरे आसार हैं। फिलहाल इविवि प्रशासन को यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है, ताकि लॉक डाउन के बाद परीक्षा संबंधी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि हर तरह से विचार करके और छात्र-छात्राओं की सहूलियत को ध्यान में रखकर ही परीक्षा की नई तिथियां निर्धारित की जाएंगी।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए बीते वर्ष 13 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आवेदन मई के प्रथम सप्ताह तक लिए गए थे और 20 मई से पांच जून के बीच सभी प्रवेश परीक्षाएं करा ली गईं थीं। जून के दूसरे सप्ताह से रिजल्ट जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी जबकि 27 जून से बीकॉम एवं बीएएलएलबी में प्रवेश शुरू हो गए थे। लेकिन, इस बार लॉक डाउन की वजह से प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की जा सकी हैं। पिछली बार अब तक वार्षिक परीक्षाएं अंतिम दौर में थीं जबकि सेमेस्टर परीक्षाएं भी निर्धारित समय में ही करा ली गईं थीं। इस बार प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन हो या वार्षिक अथवा सेमेस्टर परीक्षाओं का आयोजन, इनका संचालन शुरू करने से पहले इविवि प्रशासन को कम से कम तीन मई तक इंतजार करना होगा।
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अगर तीन मई के बाद लॉक डाउन हटता है तो भी इविवि प्रशासन के लिए परीक्षाएं करा पाना असान नहीं होगा। यहां बड़ी संख्या में छात्र दूसरे जिलों या प्रदेशों के हैं, जो लॉक डाउन में अपने घर चले गए हैं। कई छात्र ऐसे स्थानों पर रहते हैं, जिन्हें रेड जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। ऐसे में उनके लिए परीक्षा में शामिल हो पा आसान नहीं होगा। लॉक डाउन के बाद यह आशंका भी बनी रहेगी कि सोशल डिस्टेंसिंग के मद्देनजर लगाए गए तमाम प्रतिबंध हटाए जाते हैं या नहीं। परीक्षाओं में देरी के कारण नया सत्र पिछड़ने के पूरे आसार हैं। फिलहाल इविवि प्रशासन को यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है, ताकि लॉक डाउन के बाद परीक्षा संबंधी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि हर तरह से विचार करके और छात्र-छात्राओं की सहूलियत को ध्यान में रखकर ही परीक्षा की नई तिथियां निर्धारित की जाएंगी।
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