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High Court : राजस्व लॉकअप में हुई मौत मामले में अपर मुख्य सचिव राजस्व से हलफनामा तलब

Fri, 27 Jan 2023 07:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 27 Jan 2023 07:44 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 मई 2022 को राबट्र्सगंज स्थित राजस्व लॉकअप में सुधाकर प्रसाद दुबे की मौत के मामले में अपर मुख्य सचिव राजस्व से हलफनामा तलब किया है। कोर्ट ने इसकेलिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया है।

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Affidavit summoned from Additional Chief Secretary Revenue in the case of death in revenue lockup
court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 मई 2022 को राबट्र्सगंज स्थित राजस्व लॉकअप में सुधाकर प्रसाद दुबे की मौत के मामले में अपर मुख्य सचिव राजस्व से हलफनामा तलब किया है। कोर्ट ने इसकेलिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट ने उसने मुआवजे देने और जिम्मेदार अफसरों पर अभी तक कार्रवाई न होने के मामले में जवाब देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने नीरज दूबे की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने इस मामले में गृह सचिव और अपर मुख्य सचिव राजस्व से हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था। सुनवाई केदौरान केवल गृह सचिव का हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लिया। गृह सचिव की ओर से बताया गया कि मामला राजस्व विभाग का है। इस पर कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव राजस्व को एक सप्ताह भर में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।

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याची के मृतक पिता सुधारक प्रसाद दुबे की 10 लाख रुपये की वसूली

के लिए अमीन और तहसीलदार द्वारा गिरफ्तार किया गया था। राबर्टसगंज स्थित राजस्व लॉकअप में 19 मई 2022 को उनकी मौत हो गई। मामले में डीएम द्वारा मजिस्ट्रेटी जांच बैठाई गई। याची ने मजिस्ट्रेटी जांच को चुनौती दी। याची की ओर से कहा गया कि याची की ओर से कहा गया कि जांच गंभीर रूप से नहीं की जा रही है। मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य स्तर तक प्रतिवादियों का आचरण दृष्टया घोर कदाचार और कर्तव्य की अवहेलना माना। कहा कि जिम्मेदार अफसर सत्ता का दुरपयोग कर रहे हैं और कानून के शासन को प्रभावित कर रहे हैं।

याची की ओर से इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कोई परिणाम नहीं आया। जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हिरासत में मौत के मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। याची ने याचिका के जरिए निष्पक्ष जांच की मांग की।

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