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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक में गड़बड़ी से परेशान हो रहे वकील
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुकदमा बहस करने का इंतजार कर रहे हाईकोर्ट के उन तमाम वकीलों के हाथ मंगलवार को निराशा लगी, जिन्हें तकनीकी गड़बड़ी के कारण लिंक ही नहीं मिल सका। मगर, यह एक दिन की समस्या नहीं है, वकीलों की शिकायत है कि ऐसा अक्सर हो रहा है। कोट, बैंड और गाउन के साथ हाथ में मुकदमे की फाइल लेकर बहस करने का इंतजार करते दिन बीत जाता है और हाईकोर्ट से लिंक नहीं मिल पाता। सिस्टम के सही तरीके से काम न करने के कारण वकील मुकदमा बहस नहीं कर पा रहे हैं।
सिस्टम की अनिश्चितता को लेकर एडवोकेट एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अरुण के. सिंह देशवाल ने मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर को पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग की है। देशवाल का कहना है कि उन्हें हाईकोर्ट से उनके द्वारा दाखिल दो आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई की तिथि की सूचना दी गई और कहा गया कि सुनवाई के आधे घंटे पहले लिंक भेजा जाएगा, जिससे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई हो सकेगी। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया और याचिका को सुनवाई के लिए 3 मई को पेश करने का आदेश दिया गया है। इसी तरह मंगलवार को कई अन्य वकील भी लिंक नहीं मिलने के कारण मुकदमा बहस नहीं कर सके।
ऐसे ही वेबसाइट पर लंबित बैकलाग फ्रेश बेल अर्जी की सुनवाई की प्रार्थना की गई। एक हफ्ते बाद दोबारा अनुरोध किया गया, लेकिन न्यायालय प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। वकीलों का कहना है उनकी अर्जेंसी के प्रार्थनापत्र पर हाईकोर्ट की और से जवाब नहीं आता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव जेबी सिंह का कहना है कि वकीलों से शिकायत मिल रही है। इस बारे में हाईकोर्ट प्रशासन से वार्ता की गई है। उनको तीन मई तक का समय दिया गया है। इसके बाद आगे की स्थिति पर विचार किया जाएगा।
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हाईकोर्ट द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए लाया गया जिस्ती मीट सॉफ्टवेर काफी कारगर बताया जा रहा है। वकीलों का भी अनुभव इसे लेकर अच्छा है। अधिवक्ता महेश शर्मा कहते हैं कि इसके जरिए बिना रुकावट के लिंक जुड़ जाता है। आवाज भी काफी स्पष्ट होती है, जिससे एक दूसरे की बात सुनने में परेशानी नहीं होती है। सॉफ्टवेर को मोबाइल, टेबलेट या कंप्यूटर के जरिए डाउनलोड कर मुकदमा बहस की जा सकती है।
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सिस्टम की अनिश्चितता को लेकर एडवोकेट एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अरुण के. सिंह देशवाल ने मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर को पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग की है। देशवाल का कहना है कि उन्हें हाईकोर्ट से उनके द्वारा दाखिल दो आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई की तिथि की सूचना दी गई और कहा गया कि सुनवाई के आधे घंटे पहले लिंक भेजा जाएगा, जिससे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई हो सकेगी। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया और याचिका को सुनवाई के लिए 3 मई को पेश करने का आदेश दिया गया है। इसी तरह मंगलवार को कई अन्य वकील भी लिंक नहीं मिलने के कारण मुकदमा बहस नहीं कर सके।
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ऐसे ही वेबसाइट पर लंबित बैकलाग फ्रेश बेल अर्जी की सुनवाई की प्रार्थना की गई। एक हफ्ते बाद दोबारा अनुरोध किया गया, लेकिन न्यायालय प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। वकीलों का कहना है उनकी अर्जेंसी के प्रार्थनापत्र पर हाईकोर्ट की और से जवाब नहीं आता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव जेबी सिंह का कहना है कि वकीलों से शिकायत मिल रही है। इस बारे में हाईकोर्ट प्रशासन से वार्ता की गई है। उनको तीन मई तक का समय दिया गया है। इसके बाद आगे की स्थिति पर विचार किया जाएगा।
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हाईकोर्ट द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए लाया गया जिस्ती मीट सॉफ्टवेर काफी कारगर बताया जा रहा है। वकीलों का भी अनुभव इसे लेकर अच्छा है। अधिवक्ता महेश शर्मा कहते हैं कि इसके जरिए बिना रुकावट के लिंक जुड़ जाता है। आवाज भी काफी स्पष्ट होती है, जिससे एक दूसरे की बात सुनने में परेशानी नहीं होती है। सॉफ्टवेर को मोबाइल, टेबलेट या कंप्यूटर के जरिए डाउनलोड कर मुकदमा बहस की जा सकती है।