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बालिग को पसंदीदा व्यक्ति के साथ रहने की आजादी : कोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 02:12 AM IST
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Adults free to live with person of their choice: Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी बालिग को अपने पसंदीदा व्यक्ति और स्थान पर रहने की पूरी आजादी है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।
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याचिका के अनुसार, 21 जून 2026 को मऊआइमा थाने में युवती की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। चार अगस्त को इसे भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 86 (क्रूरता) और 351 (3) के तहत प्राथमिकी में बदल दिया गया। पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
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अदालत के आदेश पर पुलिस ने युवती को पेश किया। कोर्ट में युवती ने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। बातचीत के बाद कोर्ट ने उसे माता-पिता के साथ जाने की अनुमति दी। साथ ही स्पष्ट किया कि बालिग होने के नाते उसे अपनी पसंद से रहने की स्वतंत्रता है।
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मामले में युवती ने अदालत को बताया कि वह अपनी मर्जी से मो. इमरान के साथ गई थी। करीब दो महीने उसके साथ रही। हालांकि, अब वह अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है।
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