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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Adopting the ideals of Swami Vivekananda, make India the top position in the world of the 21st century.

स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर 21वीं सदी के विश्व में भारत को शीर्ष स्थान दिलाएं युवा

Sat, 11 Sep 2021 06:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 11 Sep 2021 06:45 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शिलान्यास के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि 128 साल पहले स्वामी विवेकानंद के मानवता और सहिष्णुता के संदेशों का पालन कर रोकी जा सकती थी 9/11जैसी भीषण अपराधिक घटना।

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Adopting the ideals of Swami Vivekananda, make India the top position in the world of the 21st century.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राष्ट्रपति ने इस दिन को 128 साल पहले शिकागो में विश्व समुदाय को दिए मानवता और सहिष्णुता के ऐतिहासिक संदेश के रूप में याद किया। साथ ही वैश्विक आतंकवाद से निबटने में स्वामी विवेकानंद के वर्षों पहले स्थापित मूल्यों को नए संदर्भों में याद कर उसे आत्मसात करने की भी प्रेरणा दी।
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उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का शुभारंभ ऐसे विशेष दिवस पर हो रहा है, जिसके विषय में जानकर हर भारतवासी को गर्व होगा। उन्होंने बताया कि इसी दिन शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक संबोधन के जरिए भारत के गौरव का उद्घोष किया था। उस समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद अपने चरमोत्कर्ष पर था, लेकिन स्वामी विवेकानंद के संबोधन से पूरा विश्व समुदाय भारत के आध्यात्मिक शक्ति के प्रति सम्मान से भर उठा था।
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स्वामी विवेकानंद ने हर प्रकार की धर्मांधता और उत्पीड़न के समापन की आशा व्यक्त करते हुए भारत की न्याय, समानता और करुणा पर आधारित संस्कृति तथा सहिष्णुता का संदेश पूरी मानवता तक पहुंचाया था। यदि विश्व समुदाय ने 1893 में स्वामी विवेकानंद के सहिष्णुता के संदेश को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया होता, तो शायद अमेरिका में वर्ष 2000 में 9/11 का मानवता विरोधी भीषण अपराध न हुआ होता।
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आत्म विश्वास, आत्म गौरव और देश अभिमान का जो आदर्श स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को विश्व समुदाय के समक्ष रखा था, उसी पर चलते हुए मुझे विश्वास है कि हमारी युवा पीढ़ी भारत को 21वीं सदी के विश्व में शीर्षस्थ स्थान दिलाएगी। इस उद्देश्य की प्राप्ति में भारतीय न्यायपालिका को भी अपनी महती रेखांकित करनी होगी। मैं एक बार पुन: इलाहाबाद हाईकोर्ट के बार और बेंच के सभी सदस्यों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।   
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