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अक्तूबर में अपहरण, अप्रैल में पार्सल से घर आए कपड़े, अब भी अदनान का सुराग नहीं
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Adnan kidnapping
- फोटो : AU
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प्रयागराज। हटिया में रहने वाले कारोबारी मुजीब का आठ वर्षीय बेटा अदनान दस महीनों से लापता है। पिछले वर्ष अक्तूबर में उसका अपहरण हुआ था। अप्रैल में उसके कपड़े किसी ने पार्सल से घर भेजे। मामले में 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए मुजीब के मोबाइल पर दो बार कॉल भी आ चुकी है। पुलिस ने एक रिश्तेदार को भी पकड़ा, लेकिन अदनान का कोई सुराग नहीं मिल सका। कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाने के कारण अब विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
अदनान कारोबारी मुजीब और अफ्शा के तीन बच्चों में से दूसरे नंबर पर है। 11 अक्तूबर 2018 को घर के पास से ही जब अदनान का अपहरण हुआ तब वह डान चिल्ड्रेन स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता था। चारों ओर खोजबीन की गई। किसी नाते रिश्तेदार के घर को नहीं छोड़ा गया। मुट्ठीगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दिन, हफ्ते और महीने बीतने लगे। इसी बीच मुजीब के मोबाइल पर फोन आया। कहा गया कि अदनान सुरक्षित है। 15 लाख रुपये तैयार रखो, लेकिन उसने कोई जगह नहीं बताई। मोबाइल सर्विलांस पर लगाया गया। इसी बीच चार अप्रैल 2019 को रात में किसी ने अदनान के कपड़े एक लेडीज बैग में रखकर मुजीब के घर में फेंक दिए थे। इन्हीं कपड़ों को पहने अदनान घर के पास से लापता हुआ था। पेंसिल से लिखी एक चिट्ठी भी थी, जिसमें लिखा था कि ‘अदनान सुरक्षित है। 15 लाख रुपये लेकर शास्त्री पुल पर आओ’। मुजीब के मोबाइल पर अपहर्ता का फोन भी आया। घरवालों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने पूरी तैयारी की। घरवाले पुल पर पहुंचे भी, लेकिन अपहर्ता नहीं आया। इसके बाद से अदनान का कुछ पता नहीं चल पाया है।
मुट्ठीगंज पुलिस जब इस मामले में कुछ नहीं कर पाई तो कुछ समय पहले मामला क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया। मां अफ्शा और पिता मुजीब के साथ पूरा परिवार प्रतिदिन उस खबर का इंतजार करता है, जब उनसे कोई ये कह दे कि अदनान मिल गया है। बेटे के लिए घरवालों ने पुलिस अधिकारियों के साथ ही प्रशासन और नेताओं की किसी चौखट को नहीं छोड़ी है।
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सगे मौसा ने पैसे कमाने के लिए किया था फोन, पुलिस ने पकड़ा
प्रयागराज। अदनान के पिता मुजीब के मोबाइल पर दो बार अपहर्ता का फोन आया था। सर्विलांस पर लगाया गया तो पता चला कि हटिया में रहने वाले अदनान के सगे मौसा कौसर ने ही फिरौती के लिए फोन किया था। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि मुजीब से पैसे ऐंठने के लिए उसने फोन कर दिया था। उसे लगा कि मुजीब बिना कुछ सोचे-समझे पैसे दे देगा। अदनान कहां है, वह नहीं जानता। पुलिस ने उसकी पिटाई कर उसे जेल भेज दिया था। बाद में कौसर को जमानत मिल गई लेकिन अदनान का कुछ पता नहीं चल पाया। अदनान के चाचा खालिद का आरोप है कि अदनान के अपहरण में कौसर की कहीं न कहीं भूमिका है। अगर पुलिस चाह ले तो कोई न कोई सुराग मिल जाएगा।
पुलिस ने पूरा प्रयास किया, जहां घर वालों ने कहा वहां दबिश दी गई। लोगों को पकड़ा गया। पूछताछ की गई लेकिन प्रयास सफल नहीं रहा। इसी कारण मामले को क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया। अयोध्या प्रसाद मिश्रा, विवेचक
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अदनान कारोबारी मुजीब और अफ्शा के तीन बच्चों में से दूसरे नंबर पर है। 11 अक्तूबर 2018 को घर के पास से ही जब अदनान का अपहरण हुआ तब वह डान चिल्ड्रेन स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता था। चारों ओर खोजबीन की गई। किसी नाते रिश्तेदार के घर को नहीं छोड़ा गया। मुट्ठीगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दिन, हफ्ते और महीने बीतने लगे। इसी बीच मुजीब के मोबाइल पर फोन आया। कहा गया कि अदनान सुरक्षित है। 15 लाख रुपये तैयार रखो, लेकिन उसने कोई जगह नहीं बताई। मोबाइल सर्विलांस पर लगाया गया। इसी बीच चार अप्रैल 2019 को रात में किसी ने अदनान के कपड़े एक लेडीज बैग में रखकर मुजीब के घर में फेंक दिए थे। इन्हीं कपड़ों को पहने अदनान घर के पास से लापता हुआ था। पेंसिल से लिखी एक चिट्ठी भी थी, जिसमें लिखा था कि ‘अदनान सुरक्षित है। 15 लाख रुपये लेकर शास्त्री पुल पर आओ’। मुजीब के मोबाइल पर अपहर्ता का फोन भी आया। घरवालों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने पूरी तैयारी की। घरवाले पुल पर पहुंचे भी, लेकिन अपहर्ता नहीं आया। इसके बाद से अदनान का कुछ पता नहीं चल पाया है।
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मुट्ठीगंज पुलिस जब इस मामले में कुछ नहीं कर पाई तो कुछ समय पहले मामला क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया। मां अफ्शा और पिता मुजीब के साथ पूरा परिवार प्रतिदिन उस खबर का इंतजार करता है, जब उनसे कोई ये कह दे कि अदनान मिल गया है। बेटे के लिए घरवालों ने पुलिस अधिकारियों के साथ ही प्रशासन और नेताओं की किसी चौखट को नहीं छोड़ी है।
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सगे मौसा ने पैसे कमाने के लिए किया था फोन, पुलिस ने पकड़ा
प्रयागराज। अदनान के पिता मुजीब के मोबाइल पर दो बार अपहर्ता का फोन आया था। सर्विलांस पर लगाया गया तो पता चला कि हटिया में रहने वाले अदनान के सगे मौसा कौसर ने ही फिरौती के लिए फोन किया था। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि मुजीब से पैसे ऐंठने के लिए उसने फोन कर दिया था। उसे लगा कि मुजीब बिना कुछ सोचे-समझे पैसे दे देगा। अदनान कहां है, वह नहीं जानता। पुलिस ने उसकी पिटाई कर उसे जेल भेज दिया था। बाद में कौसर को जमानत मिल गई लेकिन अदनान का कुछ पता नहीं चल पाया। अदनान के चाचा खालिद का आरोप है कि अदनान के अपहरण में कौसर की कहीं न कहीं भूमिका है। अगर पुलिस चाह ले तो कोई न कोई सुराग मिल जाएगा।
पुलिस ने पूरा प्रयास किया, जहां घर वालों ने कहा वहां दबिश दी गई। लोगों को पकड़ा गया। पूछताछ की गई लेकिन प्रयास सफल नहीं रहा। इसी कारण मामले को क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया। अयोध्या प्रसाद मिश्रा, विवेचक