फिर एडीए के होंगे यूपीडा में गए 57 गांव!
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करीब छह वर्ष इलाहाबाद विकास प्राधिकरण की सीमा से अलग हुए फाफामऊ और झूंसी के 57 गांव फिर से उसे मिलने की आस बंध गई है। लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी गंगा एक्सप्रेस-वे पर कोई काम शुरू होने के बाद एडीए ने इन गांवों को डी-नोटिफाई कराने के लिए शासन स्तर पर लिखा-पढ़ी शुरू कर दी है। एडीए का प्रयास है कि सभी गांव उसकी सीमा में वापस आ जाएं तो बड़ी आवासीय योजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा सके, क्योंकि एडीए वर्ष 1990-91 के बाद कोई नहीं आवासीय योजना नहीं शुरू कर सका है। फिर फाफामऊ और झूंसी के गांव बाहर होने से जमीन अधिग्रहण और मुश्किल हो गया है।
वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने गंगा-एक्सप्रेस-वे की योजना बनाई थी। मायावती के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथारिटी (यूपीडा) को दी गई थी। इसके तहत ग्रेटर नोएडा से बलिया तक सिक्स लेन सड़क बनाई थी। इसमें फाफामऊ के आगे गद्दोपुर, मोरहू, रुदापुर, चंदापुर, मलाक हरहर, सहसों रोड पर रंगपुरा, बहमलपुर, कुरसंड, फूलपुर रोड पर झूंसी कोहना, हवेलिया, बंधवा ताहिरपुर, इब्राहिमपुर, अंदावा, कटका, दुर्जनपुर, मलावा बुजुर्ग, मलाबा, शेरडीह, बदरा-सुनौटी, पैगंबरपुर जैसे प्रमुख गांवों के साथ कुल 57 गांवों का नोटिफिकेशन हुआ था।
जमीन यूपीडा के पक्ष में होने के बाद एडीए के सामने नई आवासीय योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का संकट खड़ा हुआ तो यहां मकानों के नक्शे स्वीकृत करने का अधिकारी भी एडीए से खत्म हो गया। अब जबकि गंगा एक्सप्रेस वे योजना ठंडे बस्ते में है और जमीन यूपीडा के पास होने के कारण एडीए को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में एडीए उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने इन गांवों की जमीन डी-नोटिफाई करने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू करा दी है, क्योंकि उनकी योजना शासन की मंशा के मुताबिक विभिन्न वर्गों के लोगों को आवास उपलब्ध कराने की है। यह काम बिना जमीन मिले संभव नहीं है।
इंडस्ट्रीयल एरिया डेवलपमेंट एक्ट की धारा 17 के तहत जो गांव यूपीडा के लिए नोटिफाइड होंगे, उनमें यूपी प्लाटिंग एेंड डेवलपमेंट एक्ट के प्रावधान स्वत: समाप्त हो जाएंगे। इसकी वजह से 57 गांव एडीए के कार्यक्षेत्र से बाहर हो गए। ऐसे में एडीए के लिए जमीन अधिग्रहण टेढ़ी खीर हो गया। शहर से 18 किलोमीटर दूर अधिग्रहण कर आवास योजना बनाने पर शहरी वहां जाने से रहे। अधिकारी भी इतनी दूर जमीन लेकर योजना शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में यूपीडा को किया गया नोटिफिकेशन निरस्त करना ही आखिरी विकल्प है।