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एडीए कर्मियों की बीमे की रकम गायब
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 10 Dec 2014 12:18 AM IST
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एडीए कर्मचारियों के वेतन से बीमा के रूप में हर माह काटी जाने वाली रकम जीवन बीमा कार्यालय में नहीं जमा हो रही है। इसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। उन्होंने इस मामले में अनियमितता का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत में उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह के सामने यह मामला उठाया और तत्काल रकम जमा कराने की मांग की।
एडीए में कार्यरत तकरीबन सात सौ कर्मचारियों के वेतन से हर माह बीमा की रकम काटी जाती है। नियमानुसार यह रकम जीवन बीमा निगम स्थित उनके खाते में जमा होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उनके वेतन से रकम तो हर माह कट रही है लेकिन यह जमा कहां हो रही है, कर्मचारियों को नहीं पता। इस संबंध में कर्मचारियों ने पूर्व में भी उपाध्यक्ष को अवगत कराया था। जनवरी एवं फरवरी में तत्कालीन प्रभारी अधिकारी अधिष्ठान ने जीवन बीमा निगम कार्यालय को पत्र लिखा था। तीन जून में भी कर्मियों ने उपाध्यक्ष को मामले से अवगत कराया। जिस पर उपाध्यक्ष ने सचिव एवं सीएफओ को तीन दिन में कार्रवाई कर अवगत कराने का निर्देश दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत में उपाध्यक्ष दो दिए गए पत्र में कहा गया कि यदि कर्मचारी आदेशों की अवहेलना करता है तो कार्रवाई हो जाती है लेकिन उच्चाधिकारी ऐसा करते हैं तो कोई कदम नहीं उठाया जाता। कर्मियों ने बताया कि इसे लेकर कई बार सीएफओ से मुलाकात की गई लेकिन उन्होंने हर बार सिर्फ आश्वासन दिया। धर्मराज सिंह, राजकुमार सिंह, नरेंद्र, मुद्रिका प्रसाद, रामचंद्र, रामजग, पन्ना लाल, राजबहादुर, सुधीर कुमार आदि की ओर से दी गए गत्र में पीपीएफ की रकम भी खाते में न जमा करने का आरोप लगाया गया। कहा गया कि इससे ब्याज का नुकसान हो रहा है। कर्मियों ने तत्काल समाधान की मांग की है।
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एडीए में कार्यरत तकरीबन सात सौ कर्मचारियों के वेतन से हर माह बीमा की रकम काटी जाती है। नियमानुसार यह रकम जीवन बीमा निगम स्थित उनके खाते में जमा होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उनके वेतन से रकम तो हर माह कट रही है लेकिन यह जमा कहां हो रही है, कर्मचारियों को नहीं पता। इस संबंध में कर्मचारियों ने पूर्व में भी उपाध्यक्ष को अवगत कराया था। जनवरी एवं फरवरी में तत्कालीन प्रभारी अधिकारी अधिष्ठान ने जीवन बीमा निगम कार्यालय को पत्र लिखा था। तीन जून में भी कर्मियों ने उपाध्यक्ष को मामले से अवगत कराया। जिस पर उपाध्यक्ष ने सचिव एवं सीएफओ को तीन दिन में कार्रवाई कर अवगत कराने का निर्देश दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में उपाध्यक्ष दो दिए गए पत्र में कहा गया कि यदि कर्मचारी आदेशों की अवहेलना करता है तो कार्रवाई हो जाती है लेकिन उच्चाधिकारी ऐसा करते हैं तो कोई कदम नहीं उठाया जाता। कर्मियों ने बताया कि इसे लेकर कई बार सीएफओ से मुलाकात की गई लेकिन उन्होंने हर बार सिर्फ आश्वासन दिया। धर्मराज सिंह, राजकुमार सिंह, नरेंद्र, मुद्रिका प्रसाद, रामचंद्र, रामजग, पन्ना लाल, राजबहादुर, सुधीर कुमार आदि की ओर से दी गए गत्र में पीपीएफ की रकम भी खाते में न जमा करने का आरोप लगाया गया। कहा गया कि इससे ब्याज का नुकसान हो रहा है। कर्मियों ने तत्काल समाधान की मांग की है।
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