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सबूत मिलने पर ही विधायक पर करेेंगे कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 13 Apr 2018 01:56 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
उन्नाव रेप कांड में प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट से साफ कहा है कि आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर ही कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। अदालत के इस सवाल पर कि सरकार विधायक को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं, महाधिक्ता राघवेंद्र सिंह ने कहा कि वह इस बारे में कोई बयान नहीं दे सकते हैं। यदि अदालत कोई आदेश देती है तो सरकार कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी।
पूरे मामले में पुलिस की ढिलाई और अभियुक्तों को बचाने की कोशिश पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने यहां तक कहा कि इस मामले से साफ है कि सूबे में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। फिलहाल अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है, जिसे शुक्रवार को दिन में दो बजे सुनाया जाएगा।
सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ का कहना था कि पीड़िता ने 17 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि चार जून को विधायक और तीन लोगों ने रेप किया। उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उसने मुख्यमंत्री से शिकायत की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी ने जांच की। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इससे पहले पीड़िता ने बहुत कुछ खो दिया। उसने आत्मदाह करने की कोशिश की और उसके पिता की हत्या हो गई। पुलिस इस दौरान क्या करती रही। विधायक के खिलाफ जांच कर गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। जबकि एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में आया है पीड़िता के आरोप प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हैं।
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महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह का कहना था कि प्राथमिकी दर्ज है और गिरफ्तारी करना जांच अधिकारी का विवेकाधिकार है कि वह पीड़िता का बयान दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी पर निर्णय ले। यही प्रक्रिया है। गंभीर अपराधों में भी तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। इस पर कोर्ट का कहना था कि पीड़िता ने जब स्वयं अपने हाथ की लिखी तहरीर दी है तो फिर 161 सीआरपीसी में उसका बयान क्यों जरूरी है। क्या हर मामले में पुलिस यही प्रक्रिया अपनाती है। महाधिवक्ता से कहा कि वह बयान दें कि गिरफ्तारी करेंगे या नहीं, इस पर महाधिवक्ता ने साफ कहा कि वह ऐसा बयान नहीं दे सकते। अदालत चाहे तो आदेश कर दे, उसका पालन किया जाएगा।
मीडिया दे रही गलत रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मीडिया पर निशाना साधा। उन्होंने कोर्ट से कहा कि मीडिया इस मामले को गलत रंग दे रही है। वैसा कुछ नहीं है, जैसा कि चैनलों पर दिखाया जा रहा है। महाधिवक्ता ने बताया कि विधायक पर पॉस्को एक्ट और बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उसके पिता की हत्या में विधायक के भाई और अन्य अभियुक्तों को जेल भेजा गया है।
संज्ञेय अपराध में हो सकती है गिरफ्तारी: एसआईटी
महाधिवक्ता की इस टिप्पणी पर कि जांच के बिना विधायक की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है कोर्ट ने अदालत में मौजूद एसआईटी के एडीजी राजीव कृष्णा से पूछा तो उनका कहना था कि यदि अपराध संज्ञेय प्रकृति का है तो तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है।
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पूरे मामले में पुलिस की ढिलाई और अभियुक्तों को बचाने की कोशिश पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने यहां तक कहा कि इस मामले से साफ है कि सूबे में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। फिलहाल अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है, जिसे शुक्रवार को दिन में दो बजे सुनाया जाएगा।
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सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ का कहना था कि पीड़िता ने 17 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि चार जून को विधायक और तीन लोगों ने रेप किया। उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उसने मुख्यमंत्री से शिकायत की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी ने जांच की। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इससे पहले पीड़िता ने बहुत कुछ खो दिया। उसने आत्मदाह करने की कोशिश की और उसके पिता की हत्या हो गई। पुलिस इस दौरान क्या करती रही। विधायक के खिलाफ जांच कर गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। जबकि एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में आया है पीड़िता के आरोप प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हैं।
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महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह का कहना था कि प्राथमिकी दर्ज है और गिरफ्तारी करना जांच अधिकारी का विवेकाधिकार है कि वह पीड़िता का बयान दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी पर निर्णय ले। यही प्रक्रिया है। गंभीर अपराधों में भी तत्काल गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। इस पर कोर्ट का कहना था कि पीड़िता ने जब स्वयं अपने हाथ की लिखी तहरीर दी है तो फिर 161 सीआरपीसी में उसका बयान क्यों जरूरी है। क्या हर मामले में पुलिस यही प्रक्रिया अपनाती है। महाधिवक्ता से कहा कि वह बयान दें कि गिरफ्तारी करेंगे या नहीं, इस पर महाधिवक्ता ने साफ कहा कि वह ऐसा बयान नहीं दे सकते। अदालत चाहे तो आदेश कर दे, उसका पालन किया जाएगा।
मीडिया दे रही गलत रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मीडिया पर निशाना साधा। उन्होंने कोर्ट से कहा कि मीडिया इस मामले को गलत रंग दे रही है। वैसा कुछ नहीं है, जैसा कि चैनलों पर दिखाया जा रहा है। महाधिवक्ता ने बताया कि विधायक पर पॉस्को एक्ट और बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उसके पिता की हत्या में विधायक के भाई और अन्य अभियुक्तों को जेल भेजा गया है।
संज्ञेय अपराध में हो सकती है गिरफ्तारी: एसआईटी
महाधिवक्ता की इस टिप्पणी पर कि जांच के बिना विधायक की गिरफ्तारी नहीं हो सकती है कोर्ट ने अदालत में मौजूद एसआईटी के एडीजी राजीव कृष्णा से पूछा तो उनका कहना था कि यदि अपराध संज्ञेय प्रकृति का है तो तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है।