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High Court : पुलिस को दिए बयान पर नहीं की जा सकती कार्रवाई, एसबीआई के कैशियर की बर्खास्तगी रद्द

Wed, 30 Jul 2025 07:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 30 Jul 2025 07:04 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक जांच के दौरान पुलिस को दिए बयान पर किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने गोंडा के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में तैनात रहे कैशियर जगपाल सिंह की बर्खास्तगी रद्द कर दी।

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Action cannot be taken on the statement given to the police, dismissal of SBI cashier cancelled
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक जांच के दौरान पुलिस को दिए बयान पर किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने गोंडा के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में तैनात रहे कैशियर जगपाल सिंह की बर्खास्तगी रद्द कर दी। साथ ही सेवा की निरंतरता को बरकरार रखने का आदेश दिया है।

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20 जून 2014 को बैंक की ग्राहक आशा पुंडीर ने याची के खिलाफ उनके खाते से अनाधिकृत रूप से 55.20 लाख रुपये निकालने का आरोप लगा एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने 26 नवंबर 2014 को उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में याची जमानत पर रिहा हो गया। पुलिस ने उनके खिलाफ 18 अप्रैल 2015 को आरोप पत्र दाखिल किया।
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आपराधिक कार्यवाही के आधार पर बैंक ने याची को 28 फरवरी 2015 को निलंबित कर दिया। नौ अक्तूबर 2015 की आई जांच रिपोर्ट में आरोप सिद्ध पाए जाने पर अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने 10 दिसंबर 2015 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। इस आदेश को अपीलीय प्राधिकारी ने भी बरकरार रखा। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। याची की ओर से उठाई गईं आपत्तियों पर विचार कर नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया था, लेकिन अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने 20 जून 2018 के आदेश से उनकी अपील दोबारा खारिज कर दी।
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इसके खिलाफ याची ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने दलील दी कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल रहे। विभागीय जांच पूरी तरह से पुलिस को दिए गए एक कथित बयानों पर आधारित है। इसे अनुशासनात्मक कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता है। मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने कहा कि बैंक चाहे तो दोबारा जांच कर सकता है या आपराधिक मामले का नतीजा आने तक इंतजार कर सकता है। नौकरी से बाहर रहने की अवधि का एक चौथाई वेतन याची को मिलेगा और उसकी सेवा निरंतर मानी जाएगी।

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