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कानून व्यवस्था के नाम पर विधि विरुद्ध कार्यवाही की अनुमति नहीं

Thu, 01 Apr 2021 12:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Apr 2021 12:20 AM IST
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Action against the law is not allowed in the name of law and order
court - फोटो : सोशल मीडिया
जिला न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दाखिल निगरानी का निस्तारण करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर विधि विरुद्ध कार्य किए जाने की अनुमति अदालत द्वारा नहीं दी जा सकती। अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि मामले में पुन: जांच कराए जाने की आवश्यकता है। न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रकरण की जांच कराकर विधि अनुरूप आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नुसरत खान ने पंधारी लाल बनाम एसडीएम कुलदेव आदि के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। 
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अदालत ने कहा कि पंधारी ने अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए ईंटें खरीद कर रखी हुईं थीं। अधिकारियों की उपस्थिति में उन्हीं ईंटों का खड़ंजा मार्ग बनाए जाने में जबरदस्ती उपयोग किया गया, जो कि एक अपराध है। इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत की गई थी। उन शिकायत प्रार्थनापत्र में लिखे तथ्यों से तथा समाचारपत्रों में प्रकाशित खबरों से भी इसकी पुष्टि होती है। अधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं और उनकी जांच कराए जाने की आवश्यकता प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किए जाने का आदेश दिए जाने के पूर्व की जा सकती है।
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यह है मामला 
 प्रकरण उतरांव थाने का है। पंधारी लाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में कुलदेव सिंह एसडीएम हडिंया, ब्रिज नारायण सिंह क्षेत्राधिकारी हंडिया, थाना प्रभारी गजानंद चौबे व अन्य के विरुद्ध एक प्रार्थना पत्र दिया था कि गांव के संतोष के पिता की मृत्यु हो गई थी, जिसमें उसके ऊपर आरोप लगाकर लाश को रखकर जाम लगाया गया था। उसके बाद बवाल हो गया था।  मौके पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी  आए थे। पंधारी द्वारा अपने उपयोग के लिए 28 हजार ईंट खरीद कर रखी गई थी। पंधारी का आरोप है कि  प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी ईंटों का प्रयोग खड़ंजा मार्ग बनवाने में किया गया। इसी मामले को लेकर पंधारी द्वारा तीनों प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीजेएम की अदालत में मुकदमा दर्ज किए जाने की अर्जी दी गई थी, जिस पर सीजेएम ने थाने से आख्या मंगाई थी। थाने की रिपोर्ट में कहा गया था कि अधिकारियों ने कोई अपराध नहीं किया है। वह शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए  मौके पर मौजूद थे। सुनवाई के बाद सीजीएम ने 18 जुलाई 2018 को वादी की अर्जी निरस्त कर दी थी। आदेश के खिलाफ पंधारी ने निगरानी दाखिल की है।
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