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-नेता नहीं जनता के प्रति हो जवाबदेही
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 25 Jul 2015 01:55 AM IST
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इलाहाबाद। राजनेताओं और ब्यूरोक्रेसी के बीच टकराव ने प्रदेश में एक नई बहस छेड़ दी है। प्रदेश सरकार से टकराव के बाद आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल केंद्र में चली गईं तो वरिष्ठ आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर निलंबित कर दिए गए। अब वर्तमान व्यवस्था से आहत प्रमुख सचिव सूर्य प्रताप सिंह ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए अर्जी दे दी है। इसी तरह कई और अफसर भी हैं जिन्हें बगावती तेवर या नेताओं की हां में हां न मिलाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। कार्यपालिका के दो महत्वपूर्ण धड़ों के बीच उपजी इस स्थिति के बाद सवाल उठने लगे हैं कि शीर्ष पर बैठे अफसर नेताओं के आगे ऐसे ही लाचार होकर भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बन जाएंगे या अपने विवेक और नियमों को सर्वोपरि रखेंगे।
सवाल उठने लगे हैं कि ब्यूरोक्रेट्स ऐसे ही नेताओं की योजनाओं को पूरा करेंगे या जनता के प्रति खुद की जवाबदेही तय करेंगे। यह भी कि क्या प्रदेश सरकार सख्त तेवर वाले आईएएस और आईपीएस की जगह उनके तंत्र से आए पीसीएस अफसराें के भरोसे सरकार चलाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार से टकराव के बाद आईएएस को वापस बुलाने के सपा नेता रामगोपाल यादव के पूर्व में दिए गए बयान से इन संभावनाओं को और बल मिलता है। इस व्यवस्था से आहत अफसरों के साथ प्रतियोगियों के जेहन में भी यह सवाल है कि क्या वे इसी भ्रष्टतंत्र और लाचारी के लिए पूरी ईमानदारी से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। इन्हीं सवालों को लेकर ‘अमर उजाला’ ने बागी अफसरों और प्रतियोगियों का मन टटोलने की कोशिश की है।
‘प्रदेश में निराशा का वातावरण है। व्यवस्था में कई खामियां हैं। इसमें बहुत लंबे समय तक काम नहीं किया जा सकता। आईएएस बड़ी नौकरी है। इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ा जा सकता है। इसके दो कारण हो सकते हैं पारिवारिक और व्यवस्था। मैंने व्यवस्था से निराश होकर वीआरएस के लिए आवेदन किया है।’
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0 सूर्य प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव
‘मैं जो स्थितियां झेल रहा हूं वह ठीक नहीं है। ऊपर के अधिकारियों को लगता है कि यदि कोई मंत्री नाराज हो गया तो नुकसान हो जाएगा। इसलिए वे अपने विवेक और कानून से हटकर नेता की सुनते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।’
0 अमिताभ ठाकुर, आईपीएस अफसर
‘नेता लोग गलत करते और कराते हैं और दबाव में आकर ब्यूरोक्रेट्स उनका साथ देते हैं। अधिकारों का उपयोग करके नेता आईएएस-पीसीएस से गलत करा लेते हैं। ब्यूरोक्रेट्स को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। अफसरों के लिए अलग संस्था की जरूरत है जिसके पास ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि का अधिकार हो। इसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। अन्यथा, ऐसे ही होता रहेगा।’
0 आरएस वर्मा, रिटायर आईएएस
‘बहुत बिडंबना है। सिस्टम में जो जैसे आएगा वैसा ही करेगा। सही तरीके से भर्ती होगी तभी अच्छे लोग आएंगे। स्थिति निराशाजनक है लेकिन इसमें बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। बहुत दिनों तक ऐसा नहीं रह सकता। एक-दो अफसरों ने जो शुरुआत की है उसका व्यापक असर दिखेगा। दिल्ली तथा कई उदाहरण हमारे सामने हैं। यहां भी बदलाव होगा।’
0 अजय शर्मा, प्रतियोगी
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सवाल उठने लगे हैं कि ब्यूरोक्रेट्स ऐसे ही नेताओं की योजनाओं को पूरा करेंगे या जनता के प्रति खुद की जवाबदेही तय करेंगे। यह भी कि क्या प्रदेश सरकार सख्त तेवर वाले आईएएस और आईपीएस की जगह उनके तंत्र से आए पीसीएस अफसराें के भरोसे सरकार चलाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार से टकराव के बाद आईएएस को वापस बुलाने के सपा नेता रामगोपाल यादव के पूर्व में दिए गए बयान से इन संभावनाओं को और बल मिलता है। इस व्यवस्था से आहत अफसरों के साथ प्रतियोगियों के जेहन में भी यह सवाल है कि क्या वे इसी भ्रष्टतंत्र और लाचारी के लिए पूरी ईमानदारी से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। इन्हीं सवालों को लेकर ‘अमर उजाला’ ने बागी अफसरों और प्रतियोगियों का मन टटोलने की कोशिश की है।
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‘प्रदेश में निराशा का वातावरण है। व्यवस्था में कई खामियां हैं। इसमें बहुत लंबे समय तक काम नहीं किया जा सकता। आईएएस बड़ी नौकरी है। इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ा जा सकता है। इसके दो कारण हो सकते हैं पारिवारिक और व्यवस्था। मैंने व्यवस्था से निराश होकर वीआरएस के लिए आवेदन किया है।’
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0 सूर्य प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव
‘मैं जो स्थितियां झेल रहा हूं वह ठीक नहीं है। ऊपर के अधिकारियों को लगता है कि यदि कोई मंत्री नाराज हो गया तो नुकसान हो जाएगा। इसलिए वे अपने विवेक और कानून से हटकर नेता की सुनते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।’
0 अमिताभ ठाकुर, आईपीएस अफसर
‘नेता लोग गलत करते और कराते हैं और दबाव में आकर ब्यूरोक्रेट्स उनका साथ देते हैं। अधिकारों का उपयोग करके नेता आईएएस-पीसीएस से गलत करा लेते हैं। ब्यूरोक्रेट्स को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। अफसरों के लिए अलग संस्था की जरूरत है जिसके पास ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि का अधिकार हो। इसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। अन्यथा, ऐसे ही होता रहेगा।’
0 आरएस वर्मा, रिटायर आईएएस
‘बहुत बिडंबना है। सिस्टम में जो जैसे आएगा वैसा ही करेगा। सही तरीके से भर्ती होगी तभी अच्छे लोग आएंगे। स्थिति निराशाजनक है लेकिन इसमें बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। बहुत दिनों तक ऐसा नहीं रह सकता। एक-दो अफसरों ने जो शुरुआत की है उसका व्यापक असर दिखेगा। दिल्ली तथा कई उदाहरण हमारे सामने हैं। यहां भी बदलाव होगा।’
0 अजय शर्मा, प्रतियोगी