Prayagraj : आधार सत्यापन से जमीन की एक से अधिक रजिस्ट्री पर कसा शिकंजा, भूमाफिया पर भी लगाम
रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने से कोई व्यक्ति अब एक से अधिक लोगों के नाम पर एक ही जमीन की रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी नहीं कर सकेगा।
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रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने से कोई व्यक्ति अब एक से अधिक लोगों के नाम पर एक ही जमीन की रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी नहीं कर सकेगा। इस पर निगरानी बढ़ाने के लिए सभी उप निबंधक कार्यालयों में आइरिस स्कैनिंग भी शुरू करा दी गई है। रजिस्ट्री में आधार का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया तो शुरुआत में कई प्रकार की तकनीकी अड़चनें आईं। इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे निबंधन विभाग का उद्देश्य था कि कोई भी व्यक्ति एक ही जमीन अलग-अलग लोगों को न बेच सके और अगर वह ऐसा करता है तो आधार के बायोमीट्रिक सत्यापन के दौरान पकड़ लिया जाए।
शुरुआत में कई लोगों की बायोमीट्रिक मशीनों पर स्कैनिंग न होने के कारण उनके बैनामे रोक दिए गए। अफसरों के लिए यह पता लगा पाना भी मुश्किल था कि आधार में गड़बड़ी है या किसी तकनीकी कारण से ऐसा हो रहा है। ऐसी स्थिति में अगर निबंधन विभाग के अफसर सिर्फ आधार कार्ड देखकर रजिस्ट्री कर देते तो उसमें गड़बड़ी की आशंका बनी रहती। इस समस्या से निपटने के लिए निबंधन विभाग ने एक अप्रैल से सभी उप निबंधक कार्यालयों में आइरिस स्कैनिंग की व्यवस्था भी लागू कर दी। दो स्तर पर बायोमीट्रिक सत्यापन की व्यवस्था से भूमाफिया पर शिकंजा कसेगा और वे जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर धोखधड़ी नहीं कर सकेंगे।
आधार के बायोमीट्रिक सत्यापन व आइरिस स्कैनिंग से निबंधन विभाग के पास भी जमीन बचने व खरीदने वाले का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। अगर कोई व्यक्ति उसी जमीन को धोखाधड़ी कर दोबारा बेचने का प्रयास करता है तो बायोमीट्रिक सत्यापन व आइरिस स्कैनिंग के दौरान पकड़ा जाएगा। निबंधन विभाग के पास भी उस व्यक्ति के खिलाफ धोखधड़ी के पर्याप्त सुबूत होंगे।