गजब : खाली मालगाड़ी के एक वैगन में भरा था कोयला, उसी से एक साइड झुकी ट्रेन
बुधवार को हादसे के बाद ही रेलवे ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए थे। साथ ही अलग-अलग विभाग के छह सुपरवाइजरों की टीम ने भी रातभर घटनास्थल का निरीक्षण कर संयुक्त जांच रिपोर्ट बनाई। संयुक्त रिपोर्ट बृहस्पतिवार को ही वरिष्ठ अफसरों को सौंप दी गई।
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प्रयागराज जंक्शन के यार्ड में पटरी से मालगाड़ी के उतरने की वजह रिपोर्ट में चौंकाने वाली सामने आई है। सात सदस्यीय सुपरवाइजरों की प्राथमिक रिपोर्ट में कहा गया है कि मालगाड़ी के जो तीन वैगन पटरी से उतरे उसमें से 18वें वैगन के एक हिस्से में तीन मीटर तक लंबाई में कोयला भरा था, जबकि दूसरी साइड खाली थी। ऐसे में ट्रेन एक साइड झुक गई और हो सकता है कि असमान अनलोडिंग की वजह से पटरी से उतर गई हो।
बुधवार को हादसे के बाद ही रेलवे ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए थे। साथ ही अलग-अलग विभाग के छह सुपरवाइजरों की टीम ने भी रातभर घटनास्थल का निरीक्षण कर संयुक्त जांच रिपोर्ट बनाई। संयुक्त रिपोर्ट बृहस्पतिवार को ही वरिष्ठ अफसरों को सौंप दी गई। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में बताया गया है कि 59 वैगन की मालगाड़ी के सभी वैगन खाली थे, लेकिन 18वें वैगन के नार्थ साइड की तरफ तीन मीटर तक लंबाई में एवं 50 सेमी की ऊंचाई तक कोयला भरा पाया गया, जबकि दक्षिणी साइड में वह खाली था।
ऐसे में वह वैगन जंक्शन के यार्ड में रेलवे लाइन के मोड़ पर एक साइड झुक गया। सुपरवाइजरों की जांच टीम जो निष्कर्ष निकाला है, उसमें कहा गया है कि पटरी से उतरे वैगनों को देखने के बाद एवं कर्मचारियों के बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि 18वें वैगन के नार्थ साइड में कोयला पाया गया। इसलिए प्रथम दृश्यता मालगाड़ी का टर्न आउट पर मूवमेंट होने से असमान अनलोडिंग के कारण वह पटरी से उतर गई। हालांकि, जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैगन की आंतरिक मापन एवं उसमें पाए गए कोयले की मात्रा को माप करने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
जांच का विषय...आखिर कोयला लदा वैगन पूरा क्यों नहीं किया गया खाली
प्रयागराज जंक्शन पर बुधवार दोपहर जो मालगाड़ी पटरी से उतरी उसे बीओबीआरएन कहा जाता है। इसमें कोयले की मैनुअल अनलोडिंग नहीं की जा सकती। ऐसे में सवाल उठता है कि जहां मालगाड़ी के सारे वैगन खाली किए गए वहां इस बात की तस्दीक क्यों नहीं की गई कि सारे कोच से कोयला खाली हुआ है या नहीं। उधर, राहतभरी बात यह है कि घटना के समय ट्रेन की स्पीड दस किमी प्रतिघंटे ही थी। अगर स्पीड 50 या 60 किमी प्रतिघंटे होती तो कई वैगन पटरी से उतर सकते थे। उधर संयुक्त जांच टीम ने भी लोको की स्पीडोमीटर ग्राफ में उसकी अधिकतम गति दस किमी प्रतिघंटे ही पाई।
यार्ड में तैनात एसएसई/पीवे का लिया गया बयान
रेलवे की ओर से गठित सात सुपरवाइजरों की टीम ने घटना के समय यार्ड में तैनात एसएसई/पीवे राहुल कुमार मौर्य का भी बयान लिया है। अपने बयान में एसएसई ने बताया कि दोपहर 3:13 बजे उसे कुछ तेज आवाज सुनाई दी। वहां देखा तो मालगाड़ी पटरी से उतर गई है। इसकी सूचना पावर केबिन को उन्होंने सबसे पहले दी। साथ ही वॉकी टॉकी के माध्यम से ट्रेन को रोके जाने का निर्देश दिया। ट्रेन रुकने के बाद इसकी सूचना अफसरों को दी गई। जांच टीम ने लोको पॉयलट खिन्नी लाल का भी लिखित बयान लिया है।
ज्वाइंट रिपोर्ट पर रेलवे के सीएमआई का अलग नजरिया
सुपरवाइजरों की ज्वाइंट रिपोर्ट पर रेलवे के एक सीएमआई का अलग नजरिया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एटा से प्रयागराज तक गाड़ी सुरक्षित आई है। इस दौरान वह कई स्टेशनों की लूप लाइन से जरूर निकली होगी। घटना के समय गाड़ी की स्पीड 10 किमी प्रतिघंटे पाई गई। इसमें डिरेलमेंट संभव नहीं है।
सुपरवाइजरों की संयुक्त टीम में टीआई /यार्ड, एसएसई/सीएंडडब्ल्यू, एसएसई/पीवे, एसएसई/टीआरडी, सीएलआई/प्रयागराज, सीएंडडब्ल्यू/प्रयागराज, एसएसई/सिग्नल शामिल रहे। घटना के बाद मालगाड़ी में लोको पॉयलट के रूप में खिन्नी लाल एवं सहायक लोको पॉयलट के अजीत सिंह यादव और मंगेश कुमार की तैनाती थी। हादसे की सूचना मिलने के बाद लोको पॉयलट और ट्रेन मैनेजर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर और प्रेशर ड्राप कर ट्रेन को दोपहर 3:14 बजे रोका था। उसके बाद इंजन द्वारा आगे के 16 और पीछे से 40 वैगनों को अलग किया गया।
अभी इस मामले की जांच चल रही है। इस वजह से अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा। सोमवार तक जांच रिपोर्ट फाइनल हो जाएगी। तभी घटना की असल वजह सामने आएगी। -हिमांशु बडोनी, मंडल रेल प्रबंधक, प्रयागराज मंडल