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Prayagraj News: एक रुपये की पर्ची पर महज सलाह, बाकी हर काम के अलग-अलग दाम
Sat, 19 Sep 2026 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:14 AM IST
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बाहर से मंगाई गयी शुगर जांच स्टिक
- फोटो : Archive
स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में मरीजों के तीमारदारों को चिकित्सकीय परामर्श के अलावा हर सेवा के लिए भुगतान करना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद तीमारदारों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब अस्पताल में कई जीवन रक्षक दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
एसआरएन अस्पताल की पीएमएसएसवाई बिल्डिंग में न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और एनेस्थीसिया आईसीयू वार्ड हैं। इन वार्डों में गंभीर मरीजों को रोजाना एक हजार रुपये बेड चार्ज देना पड़ता है। दवाइयां, शुगर जांच के लिए स्टिक और ब्लड जांच के लिए वायल भी बाहर से खरीदने पड़ते हैं। तीमारदारों के अनुसार, भर्ती मरीज को सिर्फ ग्लूकोज की बोतल मिलती है। बाकी सामान की सूची थमा दी जाती है और ब्लड रिपोर्ट के लिए कई बार चक्कर लगवाए जाते हैं। अस्पताल में रोजाना करीब 130 मरीज भर्ती होते हैं। तिमारदारों का आरोप है कि 40 फीसदी मरीजों के परिजन प्रतिदिन करीब एक हजार रुपये की दवाएं बाहर से मंगाते हैं।
जीवन रक्षक दवाओं की कमी
एसआरएन अस्पताल में लंबे समय से कई जीवन रक्षक दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इनमें नोराड्रलाइन, मिडाजोलम और फिनाइटोइन जैसे इंजेक्शन शामिल हैं। नोराड्रलाइन रक्तचाप बढ़ाने में सहायक है, जबकि मिडाजोलम ऑपरेशन से पहले घबराहट कम करता है। फिनाइटोइन मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करता है और फेंटेनल गंभीर दर्द से राहत देता है।
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मेरी माता जी का इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग में पिछले तीन दिनों से चल रहा है। रोजाना करीब एक हजार की दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ती है। कर्मचारियों का व्यवहार भी ठीक नहीं है। -हसन, तीमारदार
शुगर की जांच के लिए स्टिक और खून की जांच के लिए वायल खुद खरीदकर लाना पड़ता है। अगर शिकायत करो, तो मरीज को बाहर करने की बात कही जाती है। -राजीव कुमार, तीमारदार
मेरे बहनोई गंभीर हालत में वेंटीलेटर पर आईसीयू में भर्ती हैं। बुधवार को सीबीसी, एलएफ वन, ऐजी, एसआईई व ट्रॉप आई की जांच के लिए सैंपल जमा किया। सीबीसी की रिपोर्ट शाम को मिल गई। अन्य रिपोर्ट के लिए चार बार केंद्रीय पैथोलॉजी में दौड़ाया गया। अब कह रहे हैं कि सैंपल खराब हो गया। -ओपी त्रिपाठी, तीमारदार
हमारे यहां सारी जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध हैं। कुछ दवाइयों का ऑर्डर भी लगाया गया है। कोशिश की जा रही है कि मरीजों को कोई तकलीफ न हो। -डॉ. नीलम सिंह, प्रमुख अधीक्षक, एसआरएन अस्पताल।
अस्पताल में शिकायत बॉक्स है। अगर किसी प्रकार की समस्या है, तो अपनी शिकायत दर्ज कराएं। फिलहाल मरीजों का सैंपल काउंटर पर चेक होता है। अभी तक इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है। -डॉ. अंशुल सिंह, विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज
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एसआरएन अस्पताल की पीएमएसएसवाई बिल्डिंग में न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और एनेस्थीसिया आईसीयू वार्ड हैं। इन वार्डों में गंभीर मरीजों को रोजाना एक हजार रुपये बेड चार्ज देना पड़ता है। दवाइयां, शुगर जांच के लिए स्टिक और ब्लड जांच के लिए वायल भी बाहर से खरीदने पड़ते हैं। तीमारदारों के अनुसार, भर्ती मरीज को सिर्फ ग्लूकोज की बोतल मिलती है। बाकी सामान की सूची थमा दी जाती है और ब्लड रिपोर्ट के लिए कई बार चक्कर लगवाए जाते हैं। अस्पताल में रोजाना करीब 130 मरीज भर्ती होते हैं। तिमारदारों का आरोप है कि 40 फीसदी मरीजों के परिजन प्रतिदिन करीब एक हजार रुपये की दवाएं बाहर से मंगाते हैं।
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जीवन रक्षक दवाओं की कमी
एसआरएन अस्पताल में लंबे समय से कई जीवन रक्षक दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। इनमें नोराड्रलाइन, मिडाजोलम और फिनाइटोइन जैसे इंजेक्शन शामिल हैं। नोराड्रलाइन रक्तचाप बढ़ाने में सहायक है, जबकि मिडाजोलम ऑपरेशन से पहले घबराहट कम करता है। फिनाइटोइन मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करता है और फेंटेनल गंभीर दर्द से राहत देता है।
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मेरी माता जी का इलाज नेफ्रोलॉजी विभाग में पिछले तीन दिनों से चल रहा है। रोजाना करीब एक हजार की दवा बाहर से खरीदकर लानी पड़ती है। कर्मचारियों का व्यवहार भी ठीक नहीं है। -हसन, तीमारदार
शुगर की जांच के लिए स्टिक और खून की जांच के लिए वायल खुद खरीदकर लाना पड़ता है। अगर शिकायत करो, तो मरीज को बाहर करने की बात कही जाती है। -राजीव कुमार, तीमारदार
मेरे बहनोई गंभीर हालत में वेंटीलेटर पर आईसीयू में भर्ती हैं। बुधवार को सीबीसी, एलएफ वन, ऐजी, एसआईई व ट्रॉप आई की जांच के लिए सैंपल जमा किया। सीबीसी की रिपोर्ट शाम को मिल गई। अन्य रिपोर्ट के लिए चार बार केंद्रीय पैथोलॉजी में दौड़ाया गया। अब कह रहे हैं कि सैंपल खराब हो गया। -ओपी त्रिपाठी, तीमारदार
हमारे यहां सारी जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध हैं। कुछ दवाइयों का ऑर्डर भी लगाया गया है। कोशिश की जा रही है कि मरीजों को कोई तकलीफ न हो। -डॉ. नीलम सिंह, प्रमुख अधीक्षक, एसआरएन अस्पताल।
अस्पताल में शिकायत बॉक्स है। अगर किसी प्रकार की समस्या है, तो अपनी शिकायत दर्ज कराएं। फिलहाल मरीजों का सैंपल काउंटर पर चेक होता है। अभी तक इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है। -डॉ. अंशुल सिंह, विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज

बाहर से मंगाई गयी शुगर जांच स्टिक- फोटो : Archive