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Prayagraj News: जलभराव से स्थायी निजात के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान, 35 करोड़ होंगे खर्च
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हर साल बारिश में डूबने वाले मोहल्लों को स्थायी राहत दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत नगर निगम शहर के लिए मास्टर ड्रेनेज प्लान (डीपीआर) बनवाएगा, जिस पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए नगर आयुक्त साई तेजा ने सर्वे कमेटी गठित की है, जिसमें सीएनडीएस, जलनिगम, निर्माण विभाग के अफसरों के साथ चार पार्षदों को भी शामिल किया गया है। कमेटी की बैठक दो सितंबर को होगी।
बैठक में तय किया जाएगा कि किन इलाकों में पानी निकासी की व्यवस्था बाधित है और किस तरह की संरचनाओं की जरूरत है। नालों के चौड़ीकरण, सफाई, पाइप लाइन का जाल, मिनी एसटीपी और प्राकृतिक जल प्रवाह मार्गों को बहाल करने जैसे उपाय डीपीआर में शामिल किए जाएंगे। नगर आयुक्त का मानना है कि बिना सर्वे के काम शुरू करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। डीपीआर बनने के बाद ही संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे, जिससे जलजमाव से प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी ताैर पर निजात मिल सके। कमेटी में पार्षद आशीष द्विवेदी, द्रोपदी देवी, सिंटू मिश्रा, शिवसेवक सिंह को भी शामिल किया गया है।
बारिश में हर बार 20 से अधिक मोहल्ले में होती है जलभराव की परेशानी
हाल की बारिश में जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, बाघंबरी हाउसिंग स्कीम, गोविंदपुर और अलोपीबाग समेत 20 से अधिक मोहल्लों में पानी घरों तक घुस गया। हजारों लोग जलभराव से कई दिनों तक जूझते रहे। इन्हीं इलाकों को प्राथमिकता में रखकर मास्टर प्लान तैयार करने की कवायद की जा रही है। बालसन चौराहे से पाइप डालकर पानी बख्शी बांध की ओर भेजने का प्रस्ताव, सीएमपी चौराहे से अलोपीबाग की ओर जाने वाले पानी को रोकने के लिए एसटीपी लगाने का सुझाव, सोहबतिया बाग रौजा के पास पतले नाले और ह्यूम पाइप की वजह से रुकावट, यहां चौड़ीकरण करने और जीडीए क्लब के पास मिनी एसटीपी लगाने पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।
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बारिश के बाद होने वाली परेशानी से शहर को लंबे समय तक छुटकारा कैसे दिलाया जाए, इसको लेकर दो सितंबर को एक अहम बैठक नगर आयुक्त की अध्यक्षता में होगी। इसमें पार्षद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद सर्वे के आधार पर करीब 35 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर आपदा विभाग को भेजा जाएगा। - दीपेंद्र यादव, अपर नगर आयुक्त
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बैठक में तय किया जाएगा कि किन इलाकों में पानी निकासी की व्यवस्था बाधित है और किस तरह की संरचनाओं की जरूरत है। नालों के चौड़ीकरण, सफाई, पाइप लाइन का जाल, मिनी एसटीपी और प्राकृतिक जल प्रवाह मार्गों को बहाल करने जैसे उपाय डीपीआर में शामिल किए जाएंगे। नगर आयुक्त का मानना है कि बिना सर्वे के काम शुरू करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। डीपीआर बनने के बाद ही संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे, जिससे जलजमाव से प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी ताैर पर निजात मिल सके। कमेटी में पार्षद आशीष द्विवेदी, द्रोपदी देवी, सिंटू मिश्रा, शिवसेवक सिंह को भी शामिल किया गया है।
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बारिश में हर बार 20 से अधिक मोहल्ले में होती है जलभराव की परेशानी
हाल की बारिश में जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, बाघंबरी हाउसिंग स्कीम, गोविंदपुर और अलोपीबाग समेत 20 से अधिक मोहल्लों में पानी घरों तक घुस गया। हजारों लोग जलभराव से कई दिनों तक जूझते रहे। इन्हीं इलाकों को प्राथमिकता में रखकर मास्टर प्लान तैयार करने की कवायद की जा रही है। बालसन चौराहे से पाइप डालकर पानी बख्शी बांध की ओर भेजने का प्रस्ताव, सीएमपी चौराहे से अलोपीबाग की ओर जाने वाले पानी को रोकने के लिए एसटीपी लगाने का सुझाव, सोहबतिया बाग रौजा के पास पतले नाले और ह्यूम पाइप की वजह से रुकावट, यहां चौड़ीकरण करने और जीडीए क्लब के पास मिनी एसटीपी लगाने पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।
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बारिश के बाद होने वाली परेशानी से शहर को लंबे समय तक छुटकारा कैसे दिलाया जाए, इसको लेकर दो सितंबर को एक अहम बैठक नगर आयुक्त की अध्यक्षता में होगी। इसमें पार्षद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद सर्वे के आधार पर करीब 35 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर आपदा विभाग को भेजा जाएगा। - दीपेंद्र यादव, अपर नगर आयुक्त