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बाढ़ से फसल चौपट होने पर किसान ने खुद को गोली से उड़ाया
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लालापुर के मझियारी गांव में आत्महत्या करने वाले किसान की फाइल फोटो
- फोटो : NAINI
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बेटी की शादी के लिए रकम न जुटा पाने से तनाव में था
मंगलवार की शाम पत्नी से पैसों को लेकर हुई थी बहस
लालापुर (प्रयागराज)। मझियारी गांव में बुधवार की सुबह किसान क्रांति कुमार पांडेय ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। विगत दिनों आई बाढ़ से क्रांति की फसल चौपट हो गई थी। बेटी की शादी के लिए रुपये जुटा न पाने से वह परेशान था। कोई रास्ता न सूझने पर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
लालापुर थाना क्षेत्र के मझीयारी गांव निवासी क्रांति कुमार पांडेय (48) परिवार के साथ गांव में ही रहकर खेती करता था। परिवार में पत्नी के अलावा बड़ी बेटी नेहा (23) व दो बेटे अनिकेत (21) व पुनीत (20) हैं। वह इसी साल बेटी की शादी करने की तैयारी कर रहा था, लेकिन बीते दिनों आई बाढ़ से नष्ट हुई फसल ने उसकी परेशानी बढ़ा दी थी। बेटी की शादी के लिए क्रांति कर्ज भी तलाश रहा था, लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली। प्राकृतिक आपदा का कहर व बेटी की शादी के लिए पैसे न जुटा पाने वह अंदर से काफी टूट गया था। उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। मंगलवार की रात पत्नी से उसकी पैसों को लेकर कहासुनी हो गईं थी। भोर में जब पत्नी उठी और बाहर काम करने के लिए निकली तो इसी बीच क्रांति कुमार ने अपनी दोनाली बंदूक कनपटी पर सटाकर गोली मार ली। गोली की आवाज सुनते ही घर के लोग अंदर गए, तब तक क्रांति कुमार की मौत हो चुकी थी। शोर होने पर गांव के लोग जुट गए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बाढ़ और नीलगायों के आतंक से तबाह हुए इस गांव के किसान
लालापुर (ब्यूरो)। क्षेत्र का मझियारी गांव यमुनापार के खतरनाक गांवों में गिना जाता है। पिछले दो दशक से भले ही यह गांव शांत हो लेकिन इससे पहले यहां आए दिन घटनाएं होती थी। यमुना की तराई में बसे इस गांव के अधिकांश घरों लाइसेंसी असलहे हैं लेकिन इधर काफी दिनों से यहां की खेती गड़बड़ होने की वजह से यहां के लोग तंगहाली का शिकार हो चुके हैं। पहले बाढ़ और सूखे का प्रकोप और उसमें नीलगायों का जमुना के तराई इलाकों में घूमने वाला झूंड पूरी खेती को चौपट कर दे रहा है। क्रांति कुमार पांडेय इसी संकटग्रस्त गांव के परिवारों से ताल्लुक रखता था, जो अपनी बेटी की शादी बड़े धूमधाम से करना चाह रहा था लेकिन आर्थिक तंगी ने उसे इतना गहरा आघात पहुंचाया कि उसने खुदकुशी ही कर ली।
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बीमा योजना के नियमों में फंसे किसान
फसल बीमा के अंतर्गत भुगतान की जटिल प्रक्रिया तथा अव्यवहारिक शर्तों ने किसानों की मुसीबत और बढ़ा दी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मझियारी के किसान क्रांति कुमार को इन जटिलताओं की वजह से प्रशासन के अलावा बीमा कंपनी से भी राहत की कोई उम्मीद नहीं दिखी और आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। बाढ़ में हजारों किसानों की फसल बर्बाद हो गई लेकिन बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा से वंचित होंगे। नियमानुसार पूरे ग्राम पंचायत में 50 फीसदी फसल बर्बाद होने पर ही किसानों को फसल बीमा योजना के तहत भुगतान किया जाएगा। इसके विपरीत सच्चाई यह है कि बाढ़ की वजह से करीब 30 हजार किसानों फसल बर्बाद हो गई। इनमें से हजारों किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई लेकिन 50 फीसदी से अधिक नुकसान नदियों के किनारे बसें गांवों में ही हुआ है। इसके अलावा नुकसान को लेकर जिला प्रशासन तथा बीमा कंपनी के सर्वे रिपोर्ट में भी भारी अंतर है। ऐसे में किसानों को बीमा योजना से राहत की बहुत उम्मीद नहीं है। एसडीएम इंद्रभान तिवारी का कहना है कि किसान के आत्महत्या की जानकारी उन्हें नहीं है। उनका कहना है कि सर्वे के बार लाभार्थी किसानों की सूची तैयार की गई है। उनके खाते में मुआवजा की राशि भी पहुंचने लगी है।
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मंगलवार की शाम पत्नी से पैसों को लेकर हुई थी बहस
लालापुर (प्रयागराज)। मझियारी गांव में बुधवार की सुबह किसान क्रांति कुमार पांडेय ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। विगत दिनों आई बाढ़ से क्रांति की फसल चौपट हो गई थी। बेटी की शादी के लिए रुपये जुटा न पाने से वह परेशान था। कोई रास्ता न सूझने पर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
लालापुर थाना क्षेत्र के मझीयारी गांव निवासी क्रांति कुमार पांडेय (48) परिवार के साथ गांव में ही रहकर खेती करता था। परिवार में पत्नी के अलावा बड़ी बेटी नेहा (23) व दो बेटे अनिकेत (21) व पुनीत (20) हैं। वह इसी साल बेटी की शादी करने की तैयारी कर रहा था, लेकिन बीते दिनों आई बाढ़ से नष्ट हुई फसल ने उसकी परेशानी बढ़ा दी थी। बेटी की शादी के लिए क्रांति कर्ज भी तलाश रहा था, लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली। प्राकृतिक आपदा का कहर व बेटी की शादी के लिए पैसे न जुटा पाने वह अंदर से काफी टूट गया था। उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। मंगलवार की रात पत्नी से उसकी पैसों को लेकर कहासुनी हो गईं थी। भोर में जब पत्नी उठी और बाहर काम करने के लिए निकली तो इसी बीच क्रांति कुमार ने अपनी दोनाली बंदूक कनपटी पर सटाकर गोली मार ली। गोली की आवाज सुनते ही घर के लोग अंदर गए, तब तक क्रांति कुमार की मौत हो चुकी थी। शोर होने पर गांव के लोग जुट गए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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बाढ़ और नीलगायों के आतंक से तबाह हुए इस गांव के किसान
लालापुर (ब्यूरो)। क्षेत्र का मझियारी गांव यमुनापार के खतरनाक गांवों में गिना जाता है। पिछले दो दशक से भले ही यह गांव शांत हो लेकिन इससे पहले यहां आए दिन घटनाएं होती थी। यमुना की तराई में बसे इस गांव के अधिकांश घरों लाइसेंसी असलहे हैं लेकिन इधर काफी दिनों से यहां की खेती गड़बड़ होने की वजह से यहां के लोग तंगहाली का शिकार हो चुके हैं। पहले बाढ़ और सूखे का प्रकोप और उसमें नीलगायों का जमुना के तराई इलाकों में घूमने वाला झूंड पूरी खेती को चौपट कर दे रहा है। क्रांति कुमार पांडेय इसी संकटग्रस्त गांव के परिवारों से ताल्लुक रखता था, जो अपनी बेटी की शादी बड़े धूमधाम से करना चाह रहा था लेकिन आर्थिक तंगी ने उसे इतना गहरा आघात पहुंचाया कि उसने खुदकुशी ही कर ली।
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बीमा योजना के नियमों में फंसे किसान
फसल बीमा के अंतर्गत भुगतान की जटिल प्रक्रिया तथा अव्यवहारिक शर्तों ने किसानों की मुसीबत और बढ़ा दी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मझियारी के किसान क्रांति कुमार को इन जटिलताओं की वजह से प्रशासन के अलावा बीमा कंपनी से भी राहत की कोई उम्मीद नहीं दिखी और आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। बाढ़ में हजारों किसानों की फसल बर्बाद हो गई लेकिन बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा से वंचित होंगे। नियमानुसार पूरे ग्राम पंचायत में 50 फीसदी फसल बर्बाद होने पर ही किसानों को फसल बीमा योजना के तहत भुगतान किया जाएगा। इसके विपरीत सच्चाई यह है कि बाढ़ की वजह से करीब 30 हजार किसानों फसल बर्बाद हो गई। इनमें से हजारों किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई लेकिन 50 फीसदी से अधिक नुकसान नदियों के किनारे बसें गांवों में ही हुआ है। इसके अलावा नुकसान को लेकर जिला प्रशासन तथा बीमा कंपनी के सर्वे रिपोर्ट में भी भारी अंतर है। ऐसे में किसानों को बीमा योजना से राहत की बहुत उम्मीद नहीं है। एसडीएम इंद्रभान तिवारी का कहना है कि किसान के आत्महत्या की जानकारी उन्हें नहीं है। उनका कहना है कि सर्वे के बार लाभार्थी किसानों की सूची तैयार की गई है। उनके खाते में मुआवजा की राशि भी पहुंचने लगी है।