{"_id":"8-54901","slug":"Allahabad-54901-8","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिग्गजों ने संभाली कमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिग्गजों ने संभाली कमान
Allahabad
Updated Sat, 15 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में सियासी दलों, संगठनों तथा नेताओं का हस्तक्षेप भले ही प्रतिबंधित हो, लेकिन पूरा चुनाव वही लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरआरएस), समाजवादी पार्टी, कांग्रेस सभी ने अपने-अपने छात्रसंगठन के प्रत्याशियों को जिताने के लिए ताकत झोंक दी है। पार्टी कार्यालय और नेताओें के आवास पर दिन भर की रणनीति तय हो रही है। हालांकि रोक का इतना असर जरूर है कि परिसर के भीतर नेताओं की उपस्थिति ना के बराबर है। राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है और केंद्रीय नेतृत्व इसकी मॉनिटरिंग कर रहा। इन सभी के बावजूद नेतृत्व के सामने बागी प्रत्याशियों के साथ अपनों के धोखे से निपटने की भी चुनौती है। कई ऐसे नेता हैं जिन्हें संगठन की ओर से जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन प्रचार वे बागी उम्मीदवार का कर रहे हैं।
एबीवीपी के कार्यकर्ता माहौल पक्ष में मान रहे हैं। इसलिए इस बार विश्वविद्यालय में पांचों पद के लिए प्रत्याशी उतारे गए हैं। इसके अलावा सीएमपी में भी इस बार पैनल उतारा गया, लेकिन सबसे अधिक उठापटक भी इसी संगठन में है। पैनल से दावेदारी करने वाले आनंद कुमार सिंह ने बगावत करके नामांकन कर दिया है। छात्र नेता राणा यशवंत प्रताप सिंह तथा कई छात्र नेता खुलकर आनंद के समर्थन में आ गए हैं। टकराव का आलम ये है कि राणा यशवंत और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच शुक्रवार को फिर हाथापाई हुई। प्रदर्शन के साथ थाने में तहरीर भी दी गई है। आरआरएस की एक अहम बैठक में छात्रसंघ चुनाव में इस बगावत पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आरआरएस, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा तथा अन्य संगठन के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं तथा छात्रों को अलग-अलग काम दिए गए हैं।
समाजवादी पार्टी ने भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव इसमें सीधे तौर पर शामिल हैं और निर्भय सिंह पटेल को चुनाव प्रभारी बनाया गया है। समाजवादी छात्रसभा भी बगावत तथा अंतर्विरोध से जूझ रही है। पैनल से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह यादव को सांसद धर्मेंद्र यादव का नजदीकी रिश्तेदार बताया जा रहा है। ऐसे में यह सीट पार्टी तथा नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ गई है, लेकिन संगठन से जुड़े छात्रों का बड़ा तबका बगावत करके सामाजिक न्याय मोर्चा में गए धीरज यादव के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। ऐसे में पार्टी नेताओं के सामने इस चुनौती से निपटने की भी चिंता है। पिछले दो चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एनएसयूआई प्रत्याशियों के लिए समर्थन में आगे आ गए हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता के नेतृत्व में जिला और शहर कमेटी के अलावा कई केंद्रीय नेता भी प्रचार में छात्र-छात्राओं को जोड़ने में लगे हैं। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार चंदन सिंह को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का समर्थन मिला है। किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होने के बावजूद चंदन के समर्थन में कई नेता दिखाई दे रहे हैं। चंदन का चुनाव भी कई दिग्गज छात्र नेताओं के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एबीवीपी के कार्यकर्ता माहौल पक्ष में मान रहे हैं। इसलिए इस बार विश्वविद्यालय में पांचों पद के लिए प्रत्याशी उतारे गए हैं। इसके अलावा सीएमपी में भी इस बार पैनल उतारा गया, लेकिन सबसे अधिक उठापटक भी इसी संगठन में है। पैनल से दावेदारी करने वाले आनंद कुमार सिंह ने बगावत करके नामांकन कर दिया है। छात्र नेता राणा यशवंत प्रताप सिंह तथा कई छात्र नेता खुलकर आनंद के समर्थन में आ गए हैं। टकराव का आलम ये है कि राणा यशवंत और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच शुक्रवार को फिर हाथापाई हुई। प्रदर्शन के साथ थाने में तहरीर भी दी गई है। आरआरएस की एक अहम बैठक में छात्रसंघ चुनाव में इस बगावत पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आरआरएस, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा तथा अन्य संगठन के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं तथा छात्रों को अलग-अलग काम दिए गए हैं।
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी ने भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव इसमें सीधे तौर पर शामिल हैं और निर्भय सिंह पटेल को चुनाव प्रभारी बनाया गया है। समाजवादी छात्रसभा भी बगावत तथा अंतर्विरोध से जूझ रही है। पैनल से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह यादव को सांसद धर्मेंद्र यादव का नजदीकी रिश्तेदार बताया जा रहा है। ऐसे में यह सीट पार्टी तथा नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ गई है, लेकिन संगठन से जुड़े छात्रों का बड़ा तबका बगावत करके सामाजिक न्याय मोर्चा में गए धीरज यादव के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। ऐसे में पार्टी नेताओं के सामने इस चुनौती से निपटने की भी चिंता है। पिछले दो चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एनएसयूआई प्रत्याशियों के लिए समर्थन में आगे आ गए हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता के नेतृत्व में जिला और शहर कमेटी के अलावा कई केंद्रीय नेता भी प्रचार में छात्र-छात्राओं को जोड़ने में लगे हैं। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार चंदन सिंह को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का समर्थन मिला है। किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होने के बावजूद चंदन के समर्थन में कई नेता दिखाई दे रहे हैं। चंदन का चुनाव भी कई दिग्गज छात्र नेताओं के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
विज्ञापन