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623 कछुओं के साथ पांच तस्कर धरे गए
Allahabad
Updated Mon, 16 Dec 2013 05:42 AM IST
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इलाहाबाद। रेलवे सुरक्षा बल ने रविवार रात जंक्शन पर तस्करी कर हावड़ा ले जाए जा रहे कछुओं की बड़ी खेप पकड़ ली। आरपीएफ ने हावड़ा की ट्रेन में लादने से ऐन पहले बोरों और बैग में भरे कछुए जब्त कर पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों ने बताया कि उन्होंने सुल्तानपुर से आकर इलाहाबाद के बहरिया इलाके में दो लोगों से ये कछुए खरीदे थे। वे इन कछुओं को कोलकाता ले जाकर ऊंची कीमत पर बेच देते।
आरपीएफ पोस्ट प्रभारी आनंद कुमार को रविवार देर शाम खबर मिली जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में कुछ लोग बोरों और बैग में कुछ लेकर चढ़ रहे हैं। उनमें कछुए होने का शक था। उपनिरीक्षक पीएस परिहार और एसएन पटीदार के नेतृत्व में आरपीएफ दस्ते ने प्लेटफार्म पर जाकर बोरों और बैग की तलाशी ली। उनमें वास्तव में कछुए भरे थे। आरपीएफ ने कछुआ तस्करी के जुर्म मे िंपांच लोगों को हिरासत में ले लिया। उन्हें आरपीएफ पोस्ट ले जाकर पूछताछ की गई। पकड़े गए लोगों में सुल्तानपुर जिले में पीपरपुर इलाके के पकरी गांव निवासी राकेश, विनोद, धमेंद्र, छब्बो और विजय हैं। वे पत्थर तोड़ने का काम करते रहे हैं। पांच बोरों और तीन बैग में 623 जीवित कछुए भरे थे।
पकड़े गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने इन कछुओं को बहरिया इलाके के तिलई गांव में रहने वाले आदिवासी नाटे और बब्बू से खरीदा था। उनसे 15 रुपये किलो के भाव से खरीदे कछुओं को वे कोलकाता में भोला नामक व्यक्ति को सौ रुपये किलो में बेच देते। आरपीएफ प्रभारी आनंद कुमार के मुताबिक, कछुआ तस्करी में गिरफ्तार लोगों का कहना है कि वे पहली बार यहां से कछुआ लेकर हावड़ा जा रहे थे। उन्हें कुछ समय पहले किसी व्यक्ति ने बताया था कि कछुआ तस्करी में पैसा कमाया जा सकता है। उन्हें नहीं पता था कि यह कानूनन गंभीर अपराध है। हालांकि आरपीएफ को शक है कि ये लोग पहले भी तस्करी कर चुके हैं लेकिन पहली बार ही पकड़े गए इसलिए झूठ बोल रहे हैं।
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आरपीएफ की सख्ती की वजह से कछुओं की तस्करी में कमी तो आई है लेकिन यह गैरकानूनी धंधा पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। इसी साल 15 जनवरी को भी आरपीएफ ने जंक्शन स्टेशन पर ब्रहमपुत्र मेल से बोरों में भरे 222 कछुए बरामद किए थे। पोस्ट प्रभारी आनंद कुमार के मुताबिक, कछुओं की वो खेप गुवाहाटी जा रही थी। कछुए तो बरामद हो गए लेकिन तस्कर गिरोह की महिलाएं भाग गई थीं।
कछुओं की लगातार हो रही तस्करी के पीछे लोगों में ताकत बढ़ाने की लालसा है। खासतौर से सेक्स पावर यानी यौन शक्ति। कछुओं का इस्तेमाल सेक्स पावर की दवाएं बनाने में होता है। कोलकाता के अलावा विदेशों में उनका जूस और आचार भी बनाकर लोग खाते हैं। कोलकाता में सौ रुपये किलो में कछुए खरीद पांच गुना से ज्यादा कीमत पर बेचे जाते है। उनकी तस्करी चीन-जापान समेत कई देशों में की जाती है।
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आरपीएफ पोस्ट प्रभारी आनंद कुमार को रविवार देर शाम खबर मिली जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस में कुछ लोग बोरों और बैग में कुछ लेकर चढ़ रहे हैं। उनमें कछुए होने का शक था। उपनिरीक्षक पीएस परिहार और एसएन पटीदार के नेतृत्व में आरपीएफ दस्ते ने प्लेटफार्म पर जाकर बोरों और बैग की तलाशी ली। उनमें वास्तव में कछुए भरे थे। आरपीएफ ने कछुआ तस्करी के जुर्म मे िंपांच लोगों को हिरासत में ले लिया। उन्हें आरपीएफ पोस्ट ले जाकर पूछताछ की गई। पकड़े गए लोगों में सुल्तानपुर जिले में पीपरपुर इलाके के पकरी गांव निवासी राकेश, विनोद, धमेंद्र, छब्बो और विजय हैं। वे पत्थर तोड़ने का काम करते रहे हैं। पांच बोरों और तीन बैग में 623 जीवित कछुए भरे थे।
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पकड़े गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने इन कछुओं को बहरिया इलाके के तिलई गांव में रहने वाले आदिवासी नाटे और बब्बू से खरीदा था। उनसे 15 रुपये किलो के भाव से खरीदे कछुओं को वे कोलकाता में भोला नामक व्यक्ति को सौ रुपये किलो में बेच देते। आरपीएफ प्रभारी आनंद कुमार के मुताबिक, कछुआ तस्करी में गिरफ्तार लोगों का कहना है कि वे पहली बार यहां से कछुआ लेकर हावड़ा जा रहे थे। उन्हें कुछ समय पहले किसी व्यक्ति ने बताया था कि कछुआ तस्करी में पैसा कमाया जा सकता है। उन्हें नहीं पता था कि यह कानूनन गंभीर अपराध है। हालांकि आरपीएफ को शक है कि ये लोग पहले भी तस्करी कर चुके हैं लेकिन पहली बार ही पकड़े गए इसलिए झूठ बोल रहे हैं।
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आरपीएफ की सख्ती की वजह से कछुओं की तस्करी में कमी तो आई है लेकिन यह गैरकानूनी धंधा पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। इसी साल 15 जनवरी को भी आरपीएफ ने जंक्शन स्टेशन पर ब्रहमपुत्र मेल से बोरों में भरे 222 कछुए बरामद किए थे। पोस्ट प्रभारी आनंद कुमार के मुताबिक, कछुओं की वो खेप गुवाहाटी जा रही थी। कछुए तो बरामद हो गए लेकिन तस्कर गिरोह की महिलाएं भाग गई थीं।
कछुओं की लगातार हो रही तस्करी के पीछे लोगों में ताकत बढ़ाने की लालसा है। खासतौर से सेक्स पावर यानी यौन शक्ति। कछुओं का इस्तेमाल सेक्स पावर की दवाएं बनाने में होता है। कोलकाता के अलावा विदेशों में उनका जूस और आचार भी बनाकर लोग खाते हैं। कोलकाता में सौ रुपये किलो में कछुए खरीद पांच गुना से ज्यादा कीमत पर बेचे जाते है। उनकी तस्करी चीन-जापान समेत कई देशों में की जाती है।