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‘मीना मंच’ ने बढ़ाया रेडियो का क्रेज
Allahabad
Updated Tue, 26 Nov 2013 05:40 AM IST
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इलाहाबाद। इलेक्ट्रानिक्स बाजार से नदारद हो चुके रेडियो की बहार लौट आई है। सरकारी स्कूलों से मांग उठने पर धूल फांक रहे रेडियो चमक उठे हैं। स्थानीय बाजार से लगभग नदारद होने के कारण ज्यादातर छोटे शोरूमों पर रेडियो के स्टॉक खत्म हो गए हैं। बड़ी दुकानों पर भी गिनती के बचे हैं। उधर, स्कूलों में इनका इस्तेमाल छात्र-छात्राओं को जागरूक करने में होने जा रहा है। आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम मीना मंच के जरिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, नैतिक शिक्षा, समाज, विज्ञान आदि से जुड़े कार्यक्रम सुनाए जाएंगे। अखिलेश सरकार के लैपटॉप की तरह रेडियो तो घर-घर नहीं पहुंचेगा लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े स्कूलों के जरिए इसके संदेश जरूर हर परिवार तक पहुंचेंगे। बेसिक शिक्षा के अफसरों का दावा है कि स्कूली बच्चों के जागरूक होने का असर उनके परिवार पर भी पड़ेगा। बच्चे रेडियो पर सुनी गई कहानियां बड़े-बुजुर्गों के बीच भी सुनाएंगे। मध्य प्रदेश में इसका सफल प्रयोग हो चुका है। फिलहाल, सरकार के इस प्रयास का असर बाजार में दिखने लगा है। मोबाइल में एफएम चैनल और म्यूजिक सिस्टम ने रेडियो की प्रासंगिकता को खत्म ही नहीं किया बल्कि बाजार से भी दूर कर दिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी राज कुमार यादव का कहना है कि मीना मंच के जरिए नैतिकता, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के प्रति स्कूली छात्राओं को सामूहिक रूप से जागरूक करने की योजना है। इसके लिए रेडियो खरीदने को कहा गया है।बिक्री न होने के कारण ज्यादातर छोटे दुकानदारों ने शोरूम से इसे हटा दिया था। सोरांव के मोहनगंज प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्य रीना सिंह का कहना है कि विभाग से निर्देश मिलने के बाद रेडियो खरीदे जा रहे हैं। कई दुकानों पर तलाश के बाद यह मिल सका। बताते हैं कि जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 2477 प्राथमिक विद्यालय और 996 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। परिषद से मान्यता प्राप्त 1200 प्राथमिक विद्यालय और 900 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन सभी में रेडियो खरीदे जा रहे हैं। आशा एंड कंपनी के प्रवीण मालवीय बताते हैं कि स्कूलों में अनिवार्य किए जाने के बाद रेडियो की मांग बढ़ी है। रेडियो की ऐसी बिक्री पिछले कई वर्षों में नहीं हुई।
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