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गंगा भारतीय संस्कृति एवं एकता की मेरूदंड
Allahabad
Updated Mon, 11 Nov 2013 05:39 AM IST
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इलाहाबाद। गंगा शब्द भारतीय समाज केलिए मात्र नदी का नाम न होकर श्रद्घा, पवित्रता, आस्था, भक्ति, मुक्ति, एकात्मता का प्रतीक है। मां गंगा केबिना भारत और हिंदुत्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उक्त बातें विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल ने अरुं धती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के तत्वावधान में आयोजित ‘गंगा-दशा, दिशा एवं दृष्टि’ विषयक वैचारिक संगोष्ठी में संबोधित करते कही। गंगा की वर्तमान स्थिति पर दुख जताते हुए विहिप संरक्षक ने कहा कि उत्तराखंड में सुरंगों, बांधों का जाल बनाकर गंगा की अविरल एवं निर्मल धारा को बाधित किया जा रहा है। विभिन्न शहरोें के गंदे नालाें, कल कारखानों से निकले प्रदूषित जल को गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है। कहा कि गंगा प्रकृति का ऐसा वरदान हैं जो न केवल भौतिक अपितु मानसिक एवं बौद्घिक पोषण भी करती हैं।
संगोष्ठी में उपस्थित डॉ. विवेक निगम ने गंगा की वर्तमान दशा पर दुख जताया। डॉ. भरत झुनझुनवाला ने कहा गंगा की रक्षा एवं स्वच्छता राष्ट्र का गौरव है। वक्ता के चंद्र मौलि ने कहा कि गंगा के गौरव की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने लघु चित्र के माध्यम से गंगा के अतीत एवं वर्तमान दशा पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी की शुरूआत आचार्य शांतनु जी महाराज के गंगा स्तवन से हुई। विहिप संरक्षक सिंहल, डॉ. भरत झुनझुनवाला, के . चंद्रमौलि, प्रो. गिरीश त्रिपाठी ने मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ ही दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंद्र प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र सिंह गौड़, प्रो. एके अग्निहोत्री, प्रो. अमर सिंह, प्रो. रमेश चंद्र तिवारी, प्रो. दीनानाथ शुक्ल ‘दीन’, डॉ. केएन उत्तम, डॉ. राजेंद्र सिंह, मनोज श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव समेत कई लोग उपस्थित थे।
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संगोष्ठी में उपस्थित डॉ. विवेक निगम ने गंगा की वर्तमान दशा पर दुख जताया। डॉ. भरत झुनझुनवाला ने कहा गंगा की रक्षा एवं स्वच्छता राष्ट्र का गौरव है। वक्ता के चंद्र मौलि ने कहा कि गंगा के गौरव की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने लघु चित्र के माध्यम से गंगा के अतीत एवं वर्तमान दशा पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी की शुरूआत आचार्य शांतनु जी महाराज के गंगा स्तवन से हुई। विहिप संरक्षक सिंहल, डॉ. भरत झुनझुनवाला, के . चंद्रमौलि, प्रो. गिरीश त्रिपाठी ने मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ ही दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंद्र प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र सिंह गौड़, प्रो. एके अग्निहोत्री, प्रो. अमर सिंह, प्रो. रमेश चंद्र तिवारी, प्रो. दीनानाथ शुक्ल ‘दीन’, डॉ. केएन उत्तम, डॉ. राजेंद्र सिंह, मनोज श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव समेत कई लोग उपस्थित थे।
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