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अंतिम डुबकी से पूरा हुआ छप्पन दिनों का महापर्व
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Mon, 11 Mar 2013 04:14 PM IST
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महाकुंभ के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर रविवार को डुबकी लगाने के साथ ही छप्पन दिनों का महापर्व पूरा हुआ। माघी पूर्णिमा के बाद एक बार फिर महाशिवरात्रि पर संगम की रेती पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा। संगम से लेकर गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। मेला प्रशासन का दावा है कि लगभग 70 लाख श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर संगम स्नान किया।
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स्नान का क्रम भोर से ही शुरू हो गया था जो देर रात तक जारी रहा लेकिन शाम होते-होते स्नानघाटों पर दबाव कम होने लगा था। गंगा का आशीष लेकर लौटने के साथ ही संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी भी पूरी तरह से वीरान होने लगी। मौनी अमावस्या के बाद अखाड़े विदा हो गए थे, माघी पूर्णिमा पर कल्पवासियों ने डेरा उठाया और अब महाशिवरात्रि पर उन्होंने भी संगम की रेती को प्रणाम किया जो अब तक किसी आयोजन, अनुष्ठान के लिए रुके थे।
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स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारों के बीच जल में ही खड़े होकर शिव और सूर्य को अर्घ्य दिया। घाट किनारे भी गंगापुत्र घाटियों के पास तिलक चंदन लगवाया, यथाशक्ति दान दिया और संगम की रेती से गंगा का आशीष लेकर विदा हुए।
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अन्य स्नानपर्वों की तरह ही महाशिवरात्रि पर भी मेला क्षेत्र में वाहनों पर प्रतिबंध रहा लेकिन स्नानार्थियों ने अरैल घाट, किलाघाट से लेकर अखाड़ा घाट और रामघाट से लेकर दशाश्वमेध घाट तक बेरोकटोक डुबकी लगाई। पर्व पर घाटियों पर भी प्रतिबंध नहीं रहा। सरकुलेटिंग एरिया में घाटियों और माला, फूल, पूजा सामग्री बेचने वालों की कतारें लगीं।
वापसी में श्रद्धालुओं ने घाटों के किनारे रेती पर भी अनेक शिवलिंग बनाए जिस पर स्नानार्थियों ने पूजन, अभिषेक किया। त्रिवेणी से गंगा जल और लाई, इलाइची दाना, कलाईनारा, चूड़ी, बिंदी सहित रंग और सिंदूर का प्रसाद भी ले गए। श्रद्धालुओं ने बड़े हनुमान मंदिर, शंकर विमान मंडपम, मनकामेश्वर, वेणीमाधव, नागवासुकि सहित त्रिवेणी क्षेत्र के अन्य मंदिरों में दर्शन, पूजन, अभिषेक किया।
संगम क्षेत्र में पहली बार अमरनाथ गुफा मंदिर और अनेक प्रकार की जड़ी बूटियों से तैयार सवा कुंतल के पारदेश्वर शिवलिंग की भी पूजा की गई। गंगा सेना सहित कई संस्थाओं की ओर से चाय, खिचड़ी आदि के लंगर की व्यवस्था की गई थी। दूर तक पैदल चलने की मुश्किलों के बावजूद सभी ने महाकुंभ पर्व के अंतिम स्नानपर्व पर डुबकी लगाई और सबकुछ कुशलमंगल रहा तो लौटते चेहरों पर श्रद्धा और संतुष्टि का भाव भी दिखा।