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ज्योतिष पद्घतियों के पुनर्जागरण की जरूरत: पायलट बाबा
Allahabad
Updated Fri, 08 Feb 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। महाकुुंभ में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में ज्योतिर्विदोें को संबोधित करते हुए महायोगी पाययट बाबा ने कहा कि ज्योतिष की विभिन्न पद्घतियों का पुनर्जागरण किया जाना चाहिए। ज्योतिष विद्वानों का कर्तव्य है कि वे इस महाविद्या के संरक्षण के लिए एक मंच पर आए। देश-विदेश से आए ज्योतिष विद्वानाें को संबोधित करते हुए पायलट बाबा ने कहा कि ज्योतिष भारत का महाज्ञान है और देश से बाहर विदेशों में इसकी प्रतिष्ठा है।
योग और ज्योतिष को एक दूसरे का पूरक बताते हुए उन्हाेंने कहा कि ज्ञान की इन विधाओं का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि महाकुंभ के अवसर पर हमें गंगा और ज्योतिष की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। काशी हिंदू विवि के प्रोफेसर डा भागवत शरण शुक्ल ने कहा कि ज्योतिष एक परंपरागत शास्त्र है। इस पर वर्तमान संदर्भों में शोध करने की आवश्यकता है। राजस्थान विद्यापीठ की प्रोफेसर डा अलखनंदा शर्मा ने कुंभ का विश्लेषण करते हुए कहा कि कुंभ काल गणना पर आधारित है और सृष्टि के प्रारंभिक काल में यह परंपरा उद् भूत हुई। ज्योतिष सम्मेेलन में काशी हिंदू विवि के एक दर्जन से अधिक ज्योतिष शोधार्थियों ने अपने शोध पढ़े। कार्यक्रम का संचालन करते हुए ज्योतिर्विद पंडित ब्रजेंद्र मिश्र ने वास्तु पंचांग, वैदिक ज्योतिष के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में पंडित अवधबिहारी मिश्र, डॉ. विपिन पांडेय, साक्षी सिंह, प्रीति शर्मा, पंडित रामनरेश त्रिपाठी, आचार्य अविनाश समेत कई ज्योतिष विद्वानगण उपस्थित थे।
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योग और ज्योतिष को एक दूसरे का पूरक बताते हुए उन्हाेंने कहा कि ज्ञान की इन विधाओं का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। सुमेर पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि महाकुंभ के अवसर पर हमें गंगा और ज्योतिष की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। काशी हिंदू विवि के प्रोफेसर डा भागवत शरण शुक्ल ने कहा कि ज्योतिष एक परंपरागत शास्त्र है। इस पर वर्तमान संदर्भों में शोध करने की आवश्यकता है। राजस्थान विद्यापीठ की प्रोफेसर डा अलखनंदा शर्मा ने कुंभ का विश्लेषण करते हुए कहा कि कुंभ काल गणना पर आधारित है और सृष्टि के प्रारंभिक काल में यह परंपरा उद् भूत हुई। ज्योतिष सम्मेेलन में काशी हिंदू विवि के एक दर्जन से अधिक ज्योतिष शोधार्थियों ने अपने शोध पढ़े। कार्यक्रम का संचालन करते हुए ज्योतिर्विद पंडित ब्रजेंद्र मिश्र ने वास्तु पंचांग, वैदिक ज्योतिष के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में पंडित अवधबिहारी मिश्र, डॉ. विपिन पांडेय, साक्षी सिंह, प्रीति शर्मा, पंडित रामनरेश त्रिपाठी, आचार्य अविनाश समेत कई ज्योतिष विद्वानगण उपस्थित थे।
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